विपक्ष की याचिका पर ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस, SC ने मार्च निकालने पर राहुल से भी मांगी सफाई

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया।;

Update: 2026-10-15 08:53 GMT

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों पर सुनवाई हुई। अदालत ने एक ओर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और इंटरनेट सेवाएं बंद करने से जुड़ी अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की, वहीं दूसरी ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग तथा शीर्ष चुनाव अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के आचरण को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके अलावा जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थिति से हटाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा गया।

चुनाव आयोग और SIR पर विपक्ष की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश करने और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच सहित कई मांगें रखी हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिका पर फैसला सुनाने से पहले 13 याचिकाकर्ताओं में से किसी एक को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि किस याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल है। सुनवाई में राहुल गांधी के 12 अक्टूबर के आचरण का भी उल्लेख हुआ। उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वह फिलहाल उनकी ओर से पेश हो रहे हैं।

बिना शर्त माफी पर अदालत की टिप्पणी

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की ओर से हलफनामे दाखिल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के बावजूद लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और मेट्रो तथा इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई गईं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है और बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि अवमानना कार्यवाही में माफी मांगना एक औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा भी होता है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि हलफनामे अदालत को देर से मिले हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि सॉलिसिटर जनरल की दलीलों से माफी बिना शर्त के बजाय सशर्त जैसी प्रतीत हो रही है। अदालत की यह टिप्पणी मामले में सरकार के जवाब और माफी की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मेट्रो बंद करने और इंटरनेट प्रतिबंध पर सवाल

अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिरासत, पुलिस की कथित सख्ती, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाने से नागरिकों के अधिकार प्रभावित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि आम लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए और मेट्रो तथा ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसे प्रतिबंध नहीं होने चाहिए जिनसे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी हो। केंद्र और दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में दलील दी है कि प्रतिबंध संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को रोकने के लिए लगाए गए थे। पुलिस ने कार्रवाई को खुफिया सूचनाओं और जमीनी परिस्थितियों के आधार पर उठाया गया कदम बताया है।

जंतर-मंतर को लेकर भी केंद्र से जवाब तलब

सुनवाई के दौरान जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थिति से हटाने की मांग से जुड़ा मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। इस तरह एक ही दिन की सुनवाई में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची पुनरीक्षण, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और दिल्ली में प्रशासनिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दे अदालत के सामने आए। अब चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद इन मामलों में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

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