नई दिल्ली: राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जल्द कराने की मांग को लेकर अहम टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया से कहा कि अगर वह मामले की जल्दी सुनवाई चाहते हैं तो इसके लिए बाकायदा अर्जी दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके सामने सभी पक्ष समान हैं और मामलों की सुनवाई तय प्रक्रिया के तहत ही होगी। पीठ में सीजेआई सूर्य कांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से मामले की लिस्टिंग में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया था।
पांच महीने से सुनवाई न होने का उठाया मुद्दा
गौरव भाटिया ने अदालत के सामने कहा कि राहुल गांधी कोई वीआईपी या वीवीआईपी नहीं हैं और उनकी ओर से मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के खिलाफ दाखिल अपील पिछले करीब पांच महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मामला पहले भी लिस्ट हुआ था, लेकिन उस समय भी सुनवाई नहीं हो सकी। भाटिया ने यह भी दलील दी कि लंबे समय तक मामले का सूचीबद्ध न होना न्यायिक प्रक्रिया और संस्था के लिहाज से उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि अदालत को प्रक्रिया का पालन करने दिया जाए। उन्होंने शिकायतकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने को कहा और भरोसा दिलाया कि उस पर सुनवाई की जाएगी।
किस बयान से जुड़ा है राहुल गांधी के खिलाफ मामला?
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत उनके दिसंबर 2022 के एक बयान से संबंधित है। आरोप है कि उन्होंने भारत-चीन सीमा पर तनाव के संदर्भ में कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय सेना के जवानों की पिटाई कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह टिप्पणी चीन के साथ सीमा विवाद और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस टिप्पणी से भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और यह मानहानिकारक थी। मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई थी। उस दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया था कि संसद में मुद्दे उठाने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह की टिप्पणियां क्यों की गईं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि राहुल गांधी का बयान किसी विश्वसनीय सूचना पर आधारित था या नहीं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती
राहुल गांधी ने लखनऊ की अदालत द्वारा जारी समन को बरकरार रखने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने राहुल गांधी को मामले में पेश होने के लिए निर्देश दिया था। राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में इस कार्रवाई को चुनौती दी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। हाई कोर्ट ने शिकायत की स्वीकार्यता से जुड़े कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा था कि यदि किसी व्यक्ति को कथित अपराध से नुकसान या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो वह संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत शिकायतकर्ता के रूप में सामने आ सकता है।
पूर्व BRO अधिकारी की ओर से दायर हुई शिकायत
यह मामला पूर्व बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से दाखिल शिकायत से जुड़ा है। उनकी ओर से वकील विवेक तिवारी ने शिकायत दायर की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 9 दिसंबर 2022 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के संबंध में 16 दिसंबर को राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी भारतीय सेना के लिए अपमानजनक थी। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि सेना के प्रति गहरा सम्मान रखने के कारण उन्हें राहुल गांधी की टिप्पणी से व्यक्तिगत रूप से ठेस पहुंची। इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की मांग की। हाई कोर्ट ने भी माना था कि शिकायतकर्ता मामले में कानूनी रूप से शिकायत दर्ज कराने का अधिकार रखता है।
अब जल्द सुनवाई के लिए अर्जी पर नजर
बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। अदालत ने फिलहाल शिकायतकर्ता को प्रक्रिया के तहत जल्द सुनवाई के लिए आवेदन देने को कहा है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आवेदन दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी की अपील को किस तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करता है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जिसे भारत-चीन सीमा विवाद और सेना की स्थिति को लेकर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के संदर्भ में देखा जाता रहा है।