दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भारत का UN को जवाब, OHCHR की चिंता को बताया आंतरिक मामलों में दखल

भारत की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर 'इंडिया एट यूएन' के आधिकारिक अकाउंट से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी गई। पोस्ट में कहा गया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां संविधान शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार की गारंटी देता है।;

Update: 2026-10-11 07:14 GMT

नई दिल्ली: भारत ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर हुए बड़े प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र को कड़ा जवाब दिया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की चिंता को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और प्रदर्शन करने का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है। देश की मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया इस अधिकार की रक्षा करते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणियों को देश के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप भी करार दिया। भारत की यह प्रतिक्रिया उस समय आई, जब OHCHR ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने और बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने की अपील की थी।

भारत ने कहा- संविधान देता है शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार

भारत की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर 'इंडिया एट यूएन' के आधिकारिक अकाउंट से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी गई। पोस्ट में कहा गया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां संविधान शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार की गारंटी देता है। पोस्ट के मुताबिक, देश में मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और आजाद मीडिया के माध्यम से इस अधिकार की रक्षा की जाती है। भारत ने कहा कि अन्य लोकतांत्रिक देशों की तरह यहां भी नागरिक अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू उचित प्रतिबंधों का पालन करना होता है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी कानून के अनुसार काम करते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए अदालतें उपलब्ध हैं। इसी आधार पर नई दिल्ली ने OHCHR की चिंताओं को गलत बताते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप हैं।

OHCHR ने हिरासत में लिए जाने की खबरों पर जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त की थी। कार्यालय के अनुसार, प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान प्रदर्शनकारियों के अलावा आंदोलन से जुड़े नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं। मानवाधिकार कार्यालय ने भारतीय अधिकारियों से अपील की थी कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। उसने यह भी कहा कि जिन लोगों को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान संयम बरतने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने एक बयान में कहा कि उनका कार्यालय प्रदर्शनकारियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों को लेकर चिंतित है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान किया जाए और प्रदर्शनकारियों से निपटते समय संयम बरता जाए। प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होना चाहिए। OHCHR की अपील का मुख्य जोर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने और हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की उचित समीक्षा करने पर था।

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