इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को लेकर केंद्र सख्त, मेटा को जारी किया नोटिस

इससे पहले भी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सवाल किया था कि इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन प्रसारित कैसे हुए। सरकार ने कंपनी से यह भी पूछा था कि ऐसे विज्ञापनों की पहचान करने और उन्हें समय रहते हटाने के लिए प्लेटफॉर्म पर कौन-सी व्यवस्था लागू है।;

Update: 2026-07-05 08:38 GMT

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित सामग्री (Child Sexual Exploitation and Abuse Material-CSEAM) से जुड़े कथित पेड विज्ञापनों को गंभीरता से लेते हुए मेटा को सख्त नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट तुरंत हटाए जाएं, जो इस तरह की अवैध सामग्री को बढ़ावा देते हों या उसकी पहुंच आसान बनाते हों। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस मामले में मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है।

कंटेंट मॉडरेशन पर भी मांगी जा सकती है जानकारी

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय केवल इस घटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की भी समीक्षा कर सकता है। इसके तहत कंपनी से यह जानकारी मांगी जा सकती है कि वह प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों की जांच कैसे करती है और अवैध या हानिकारक सामग्री की पहचान कर उसे हटाने के लिए कौन-सी तकनीकी और मानवीय प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इसके अलावा मंत्रालय यह भी जानना चाहता है कि भविष्य में इस प्रकार की सामग्री को रोकने के लिए कंपनी क्या अतिरिक्त कदम उठाने जा रही है।

पहले भी सरकार ने मांगा था स्पष्टीकरण

इससे पहले भी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सवाल किया था कि इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन प्रसारित कैसे हुए। सरकार ने कंपनी से यह भी पूछा था कि ऐसे विज्ञापनों की पहचान करने और उन्हें समय रहते हटाने के लिए प्लेटफॉर्म पर कौन-सी व्यवस्था लागू है। मंत्रालय ने विशेष रूप से यह जानकारी भी मांगी थी कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए मेटा ने अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए हैं। खबर लिखे जाने तक इस पूरे मामले पर मेटा की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया था।

व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर भी सरकार की नजर

इसी बीच, व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी केंद्र सरकार और मेटा के बीच बातचीत जारी है। सूत्रों के अनुसार, मेटा के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर इस फीचर से जुड़े सभी सवालों का विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद मंत्रालय ने इस विषय पर भी कंपनी को औपचारिक नोटिस जारी किया है।

रोलआउट पर फिलहाल लगी है रोक

हाल ही में भारत सरकार ने व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर के प्रस्तावित रोलआउट को फिलहाल रोक दिया था। सरकार की चिंता थी कि यदि इस सुविधा को पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया गया, तो इससे पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अनचाहे संपर्क जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। सरकार इन संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए कंपनी से विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था का विवरण मांग रही है।

मेटा ने फीचर को बताया पूरी तरह वैकल्पिक

व्हाट्सएप की मूल कंपनी मेटा ने स्पष्ट किया है कि नया यूजरनेम फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) होगा। यानी किसी भी उपयोगकर्ता के लिए यूजरनेम बनाना अनिवार्य नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, इस फीचर को लागू करने से पहले कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं ताकि पहचान की चोरी, फर्जी प्रोफाइल और साइबर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।

सार्वजनिक हस्तियों के यूजरनेम रहेंगे सुरक्षित

मेटा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पूछे गए सवालों के जवाब में बताया कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पहले से उपयोग किए जा रहे यूजरनेम, सरकारी संस्थानों, सार्वजनिक हस्तियों और मेटा वेरिफाइड खातों के नाम सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे कोई अन्य व्यक्ति इन नामों का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि यूजरनेम प्रणाली को इस तरह तैयार किया जा रहा है, जिससे वास्तविक खातों की पहचान सुरक्षित रहे और फर्जी प्रोफाइल बनने की संभावना कम हो।

ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ी निगरानी

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, अवैध कंटेंट की रोकथाम और उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को लेकर भारत सरकार हाल के वर्षों में लगातार सख्त रुख अपनाती रही है। इंस्टाग्राम पर सीएसईएएम से जुड़े कथित विज्ञापनों और व्हाट्सएप के नए फीचर पर सरकार की सक्रियता इसी व्यापक नीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब निगाहें मेटा के जवाब पर टिकी हैं। कंपनी द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि इन दोनों मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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