10 करोड़ बैरल तेल जारी करेंगे जी-7 देश

ईंधन कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बीच जी7 देशों ने आने वाले हफ्तों में 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की घोष;

Update: 2026-10-03 12:05 GMT

ईंधन कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बीच जी7 देशों ने आने वाले हफ्तों में 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की घोषणा की है, जिसकी शुरुआत डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में उतारने से होगी.

दुनिया की सात प्रमुख विकसित लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी7 ने शुक्रवार को घोषणा करते हुआ कहा कि वह आने वाले हफ्तों में 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद बाजार में जारी करेगा. इस पहल की शुरुआत डीजल की "बड़ी मात्रा" जारी करने से होगी. अमेरिका में हाल ही में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि डीजल की यह रिलीज "तुरंत" शुरू होगी. यह जी7 की उस घोषणा के अनुरूप है जिसमें अगले 20 दिनों के भीतर डीजल की पर्याप्त मात्रा बाजार में उतारने और बाकी भंडार को अगले चार महीनों में जारी करने की बात कही गई है.

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने का दबाव है. 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले बढ़ती लागत एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन गई है. ट्रंप ने इस कदम की घोषणा शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए की.

एपी-एनओआरसी सर्वेक्षण के अनुसार, अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. ईरान युद्ध और उनके व्यापारिक टकरावों को अमेरिका में तेल और अन्य चीजों की कीमतों में वृद्धि का कारण माना जा रहा है.

पिछले आठ महीनों से जारी युद्ध के दौरान अमेरिका और अन्य देशों में ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि यदि इससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके तो यह कीमत चुकाना उचित है. अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन एएए के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही. इससे पहले 22 सितंबर को यह रिकॉर्ड 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी. यूरोप में भी डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं.

सस्ता होगा डीजल

ऊर्जा और अर्थशास्त्र पर केंद्रित शोध संस्था एनर्जी पॉलिसी रिसर्च फाउंडेशन के फेलो माइकल लिंच ने कहा कि यूरोप में डीजल भंडार जारी करने से अमेरिका की डीजल निर्यात की जरूरत घट सकती है. उनके अनुसार, इससे कुछ हफ्तों के भीतर अमेरिका में डीजल की कीमतें 25 से 50 सेंट प्रति गैलन तक कम हो सकती हैं.

इस साल जी7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जी7 नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की, जिसके बाद यह घोषणा जारी की गई. जी7 समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं, जबकि यूरोपीय संघ का भी इसमें प्रतिनिधित्व रहता है.

यह कदम मार्च में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों द्वारा घोषित उस योजना के बाद आया है, जिसके तहत तेल बाजार को स्थिर करने के लिए 42.6 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने का फैसला लिया गया था. यूरोपीय संघ के देशों ने लगभग 9.2 करोड़ बैरल उपलब्ध कराने का वादा किया था, जिसमें कच्चे तेल से तैयार होने वाले डीजल जैसे उत्पाद प्रमुख थे.

माक्रों ने कहा, "यह साझा निर्णय और यह एकजुटता कीमतों को कम करने में मदद करेगी." उन्होंने कहा कि जारी किए जाने वाले भंडार से बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा.

युद्धों का असर

डीजल की कीमतों में वृद्धि के पीछे केवल कच्चे तेल की महंगाई ही जिम्मेदार नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अपने रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि यूरोप रूसी डीजल का आयात नहीं करता, लेकिन तुर्की और लैटिन अमेरिकी देशों जैसे अन्य खरीदारों को अब उपलब्ध सप्लाई के लिए यूरोप के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है. इसके अलावा, फारस की खाड़ी क्षेत्र के उत्पादक देशों से ईंधन उत्पादों की सप्लाई भी युद्ध से हुए नुकसान और निर्यात मार्गों के बंद होने के कारण घटी है.

जी7 की घोषणा के बाद अमेरिकी तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि रेमंड जेम्स के निवेश रणनीति विश्लेषक पावेल मोल्चानोव के अनुसार बाजार में कुछ अनिश्चितता बनी रही. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि घोषित 10 करोड़ बैरल मार्च में किए गए वादे के अतिरिक्त है या फिर उसी प्रतिबद्धता का अंतिम हिस्सा.

बैठक में जी7 देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि सदस्य देश एक-दूसरे पर ऊर्जा निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाएंगे. अमेरिका में कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने घरेलू कीमतें घटाने के लिए डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. लेकिन ट्रंप ने इस विकल्प को खारिज कर दिया. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम कभी ऐसा करने वाले नहीं थे. हम निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाएंगे." ट्रंप ने कहा कि यूरोप और अमेरिका दोनों वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.

जोखिम भी मौजूद

विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन भंडार का उपयोग कुछ देर के लिए ही राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में इसके जोखिम भी हैं.

राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टीट्यूट में ऊर्जा शोध फेलो जिम क्रेन ने कहा कि भंडार खाली करने से खुदरा ईंधन की कीमतें कुछ समय के लिए कम हो सकती हैं, लेकिन इससे यूरोप की आपातकालीन सुरक्षा क्षमता घट जाएगी. उन्होंने कहा कि भविष्य में जी7 देशों को अपने रणनीतिक भंडार फिर से भरने होंगे और यह कब संभव होगा, इसकी तस्वीर साफ नहीं है.

क्रेन ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे समय में जब दो युद्ध जारी हैं और रिफाइनरियों तथा निर्यात ढांचे पर हमले हो रहे हैं, आपातकालीन भंडार का उपयोग जोखिम भरा हो सकता है. उनके अनुसार, भविष्य की कीमतों या संभावित शांति समझौतों को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर मौजूद नहीं है.

फ्रांसीसी दूतावास के अनुसार, ईंधन कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर चर्चा के लिए ट्रंप और माक्रों के बीच रात में बातचीत भी हुई थी. इसके बाद माक्रों ने जी7 नेताओं की वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक की अध्यक्षता की. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार ट्रंप ने भी बैठक में हिस्सा लिया और यूरोपीय डीजल भंडार जारी करने के मुद्दे पर चर्चा की.

इस बीच ट्रंप ने गुरुवार को 32 दिनों तक चलने वाले चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत की है, जिसका मकसद नवंबर के चुनावों में कांग्रेस और सेनेट पर रिपब्लिकन नियंत्रण बनाए रखना है. राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि अर्थव्यवस्था पर उनके काम को वह "ए-प्लस" ग्रेड देते हैं, लेकिन उनके अनुसार उनकी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार में कमी रही है.

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