Ashoka Chakra: अंतरिक्ष के नायक ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को राष्ट्रपति ने किया अशोक चक्र से सम्मानित

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में इतिहास रचते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित एक्सिओम मिशन-4 (Axiom-4) के तहत 18 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। इस मिशन के साथ ही वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने।

Update: 2026-01-26 09:51 GMT
नई दिल्‍ली: भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति-कालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड समारोह में प्रदान किया गया। पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक क्षण पर टिकी थीं, जब एक अंतरिक्ष यात्री, फाइटर पायलट और सैन्य अधिकारी को राष्ट्र की सर्वोच्च नागरिक–सैन्य उपलब्धि के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत वीरता और कौशल का प्रतीक है, बल्कि भारत की उभरती मानव अंतरिक्ष क्षमता और वैश्विक वैज्ञानिक मंच पर उसकी मजबूत उपस्थिति को भी रेखांकित करता है।

70 जवानों व अधिकारियों को वीरता पुरस्कार


सरकार ने एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र समेत सेना के 70 जवानों व अधिकारियों को वीरता पुरस्कार दिया गया। इनमें से छह को यह सम्मान मरणोपरांत है। 13 शौर्य चक्र में से 10 थलसेना के जवानों (एक मरणोपरांत), दो नौसेना और एक अर्धसैनिक बल के अधिकारियों को प्रदान किए गए हैं।  इन अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र के अलावा एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता), छह नौसेना मेडल (वीरता) और दो वायुसेना मेडल शामिल हैं।

अंतरिक्ष में भारत का नया अध्याय

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में इतिहास रचते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित एक्सिओम मिशन-4 (Axiom-4) के तहत 18 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। इस मिशन के साथ ही वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने। इससे पहले 1984 में भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सोयूज मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रा कर इतिहास बनाया था। चार दशक बाद शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष सफर में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

एक्सिओम-4 मिशन की अहम भूमिका

एक्सिओम-4 मिशन एक बहुराष्ट्रीय और बहु-संस्थागत सहयोग का उदाहरण रहा। इस मिशन में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सक्रिय भागीदारी रही। मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला ने पायलट की भूमिका निभाई और अंतरिक्ष स्टेशन पर कई उन्नत वैज्ञानिक प्रयोगों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इन प्रयोगों का संबंध मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव, अंतरिक्ष में सामग्री विज्ञान, जैविक अनुसंधान और दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी से था। वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने उनकी तकनीकी दक्षता, अनुशासन और मिशन के प्रति प्रतिबद्धता की खुलकर सराहना की।

फाइटर पायलट से अंतरिक्ष यात्री तक का सफर

शुभांशु शुक्ला एक अनुभवी लड़ाकू पायलट हैं। उनके पास 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है, जो उन्हें भारतीय वायुसेना के चुनिंदा और अत्यंत प्रशिक्षित अधिकारियों की श्रेणी में रखता है। उन्होंने सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे अत्याधुनिक और विविध श्रेणी के विमानों को उड़ाया है। फाइटर पायलट के रूप में उनकी पहचान तेज निर्णय लेने की क्षमता, उच्च दबाव में कार्य करने के कौशल और असाधारण मानसिक संतुलन के लिए रही है। यही गुण उन्हें अंतरिक्ष मिशन के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाते हैं।

लखनऊ से कर्तव्य पथ तक

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव अनुशासन, उड़ान और राष्ट्रसेवा की ओर रहा। लखनऊ जैसे सैन्य परंपराओं से जुड़े शहर में पले-बढ़े शुभांशु पर वायुसेना के माहौल का गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने कारगिल युद्ध और भारतीय वायुसेना के एयरशो को करीब से देखा, जिसने उनके मन में फाइटर पायलट बनने का सपना और मजबूत किया। इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में प्रवेश के लिए आवेदन किया और कठिन चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल की।

वायुसेना में कमीशन और करियर

जून 2006 में शुभांशु शुक्ला को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने विभिन्न परिचालन और प्रशिक्षण इकाइयों में सेवाएं दीं। अपने करियर के दौरान उन्होंने तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता का भी परिचय दिया। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, नवाचार और मिशन के प्रति समर्पण प्रमुख रहा है। यही कारण है कि उन्हें अंतरिक्ष मिशन जैसे उच्च जोखिम और उच्च प्रतिष्ठा वाले दायित्व के लिए चुना गया।

अशोक चक्र: प्रतीक साहस और समर्पण का

अशोक चक्र से सम्मानित किया जाना किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए सर्वोच्च गौरव होता है। यह पुरस्कार असाधारण वीरता, आत्मबलिदान और राष्ट्रहित में किए गए अद्वितीय कार्यों के लिए प्रदान किया जाता है। शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान अंतरिक्ष मिशन के दौरान उनके साहस, नेतृत्व और भारत की रणनीतिक क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दिया गया है।

अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक

विशेषज्ञों का मानना है कि शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों, विशेष रूप से गगनयान कार्यक्रम, के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। यह सफलता दर्शाती है कि भारत अब न केवल प्रक्षेपण तकनीक में, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का यह सफर लखनऊ के एक सपने देखने वाले बच्चे से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और कर्तव्य पथ तक पहुंचने की कहानी है, जो साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की मिसाल बन चुकी है।

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