मुस्तफा मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत, एमडीए ने पुराना नोटिस वापस लिया

मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र स्थित मुस्तफा मस्जिद के संरक्षण के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद को कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने मस्जिद के खिलाफ जारी शो कॉज नोटिस वापस ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में जारी नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस ले लिया गया है। अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा।;

Update: 2026-10-01 12:54 GMT

नई दिल्ली। मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र स्थित मुस्तफा मस्जिद के संरक्षण के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद को कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने मस्जिद के खिलाफ जारी शो कॉज नोटिस वापस ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में जारी नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस ले लिया गया है। अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा।

यह मामला मुतवल्ली मस्जिद जीशान अहमद फरीद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर किया गया था। अदालत ने प्रतिवादी की ओर से दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

मुस्तफा मस्जिद के खिलाफ 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27(1) के तहत शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस को मस्जिद के मुतवल्ली जीशान अहमद फरीद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि नोटिस अस्पष्ट है और उसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी एवं दस्तावेजी पहलुओं को स्पष्ट नहीं किया गया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि मस्जिद के खिलाफ किसी भी ध्वस्तीकरण या जबरन कार्रवाई को कानून के अनुरूप प्रक्रिया पूरी होने तक रोका जाए।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि पूर्व नोटिस अस्पष्ट था, इसलिए उसे वापस ले लिया गया है और अब कानून के अनुसार नया नोटिस जारी किया जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

मुस्तफा मस्जिद के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कानूनी कार्रवाई संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के मार्गदर्शन में जारी है। मस्जिद के संरक्षण के लिए कानूनी कार्रवाई की तैयारी और पैरवी में अधिवक्ता मोहम्मद ताहिर हकीम, अधिवक्ता मोहम्मद निजाम पाशा और जमीयत उलेमा-ए-गुजरात के महासचिव प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अदालत में मस्जिद की ओर से जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड आदित्य परिहार ने पक्ष रखा। इससे पहले 24 सितंबर को हुई सुनवाई में भी मस्जिद के कानूनी संरक्षण को लेकर प्रभावी तरीके से पक्ष रखा गया था। उस दौरान स्थानीय प्रशासन की ओर से अदालत में यह आश्वासन दिया गया था कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि मुस्तफा मस्जिद के मामले में हमारी कानूनी लड़ाई को एक दिशा मिली है, लेकिन अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है।

उन्होंने कहा कि हमारी कानूनी लड़ाई का उद्देश्य केवल मस्जिद का संरक्षण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी भी नागरिक या धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही हो।

मौलाना मदनी ने कहा कि पुराने नोटिस का वापस लिया जाना इस कानूनी संघर्ष में महत्वपूर्ण प्रगति है। धार्मिक मामलों में प्रशासन को अधिक सावधानी और संवेदनशीलता के साथ काम करने की आवश्यकता है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि वह मुस्तफा मस्जिद मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर सभी उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करेगी।


Tags:    

Similar News