वायुसेना को मिलेगी बड़ी ताकत: 114 नए राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया तेज, 94 भारत में ही बनेंगे

Update: 2026-06-02 07:28 GMT

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत ने फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए अनुरोध-पत्र (Letter of Request) जारी कर दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस संभावित रक्षा सौदे को भारत के सबसे बड़े सैन्य विमान सौदों में से एक माना जा रहा है। इस प्रस्ताव के साथ भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

पहली बार फ्रांस के बाहर बनेगा राफेल

इस प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि 114 विमानों में से 94 राफेल जेट भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दासौ एविएशन किसी भारतीय साझेदार कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन करेगी। यदि यह योजना अंतिम रूप लेती है तो यह पहला अवसर होगा जब राफेल विमान का निर्माण फ्रांस के बाहर किसी अन्य देश में किया जाएगा। इस पहल को ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भारत में रक्षा विनिर्माण, तकनीकी विशेषज्ञता और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

फ्रांस को भेजा गया आधिकारिक अनुरोध

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय की खरीद शाखा ने हाल ही में फ्रांस सरकार को औपचारिक अनुरोध-पत्र भेजा है। अब फ्रांस की ओर से इस प्रस्ताव पर विस्तृत जवाब आने की प्रतीक्षा है। माना जा रहा है कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस अपनी प्रतिक्रिया देगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच कीमत, तकनीकी हस्तांतरण, उत्पादन व्यवस्था और अन्य शर्तों पर बातचीत आगे बढ़ेगी। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि प्रक्रिया तय समय के अनुसार चलती है तो अगले एक वर्ष के भीतर इस महत्वपूर्ण सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है चर्चा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जून मध्य में फ्रांस दौरे पर जाने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान फ्रांस के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बैठक में रक्षा सहयोग और राफेल सौदे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। उधर, भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी इस समय फ्रांस में मौजूद हैं। उनके दासौ एविएशन की उत्पादन इकाई का दौरा करने की संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमान तैयार किए जाते हैं। इससे दोनों देशों के बीच चल रही रक्षा वार्ताओं को और गति मिल सकती है।

वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी

भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की संख्या में कमी की चुनौती का सामना कर रही है। वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों और दो मोर्चों पर संभावित खतरों को देखते हुए आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। राफेल को 4.5वीं पीढ़ी का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमला करने में सक्षम है। इसकी आधुनिक रडार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता और लंबी दूरी की मारक शक्ति इसे दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल करती है।

176 तक पहुंचेगी राफेल की संख्या

भारत पहले ही वायुसेना और नौसेना के लिए कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुका है। यदि 114 नए विमानों का सौदा पूरा हो जाता है तो देश के पास राफेल विमानों की कुल संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों को शामिल करने की इच्छा भी जताई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत के राफेल बेड़े की संख्या 200 के आंकड़े को पार कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय की दीर्घकालिक रणनीति 

रक्षा मंत्रालय ने हाल के वर्षों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक योजना पर काम किया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वायुसेना की आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन किया गया था। इसी रणनीति के तहत आधुनिक लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चार महीने पहले रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब फ्रांस को अनुरोध-पत्र जारी होने के साथ यह प्रक्रिया अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है।

भारत की हवाई शक्ति को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक ताकत को भी नई ऊंचाई देगा। राफेल विमानों की बढ़ती संख्या भारतीय वायुसेना को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाएगी और देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

Tags:    

Similar News