नई दिल्ली: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने एयरलाइंस को हवाई किराये में अनावश्यक बढ़ोतरी से बचने का संदेश दिया है। नागरिक विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि त्योहारों और बड़े अवसरों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ किराये में तेज उछाल नहीं आना चाहिए। मंत्रालय इस संबंध में एयरलाइंस के साथ लगातार संपर्क में है और नियमित बैठकें भी कर रहा है। नायडू ने कहा कि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर और परिवार के पास लौटना चाहते हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि यात्रियों को ऊंचे हवाई किराये का अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विमानन ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत पर पड़ रहा है।
उड़ान योजना का दस साल के लिए विस्तार
नागरिक विमानन मंत्री ने उड़ान योजना के नए चरण की घोषणा करते हुए कहा कि इसे अब अगले दस वर्षों तक जारी रखा जाएगा। क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के अगले चरण के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौते किए गए हैं। इनमें बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम, राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य छोटे शहरों और देश के दूर-दराज के इलाकों को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है, ताकि इन क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए लंबी सड़क या रेल यात्रा पर निर्भर न रहना पड़े।
60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी
उड़ान के नए चरण के तहत विमानन क्षेत्र में बड़े निवेश की योजना बनाई गई है। नायडू के मुताबिक केंद्र सरकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी। राज्यों की ओर से भी लगभग इतनी ही राशि के निवेश की संभावना है। इस तरह योजना के तहत कुल करीब 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने का रास्ता खुल सकता है। सरकार की योजना इस चरण में करीब 100 नए हवाई अड्डे विकसित करने और लगभग 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने की है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ छोटे शहरों में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
1.68 करोड़ यात्रियों को मिला फायदा
सरकार के अनुसार उड़ान योजना के तहत अब तक देश में 90 से अधिक हवाई अड्डों को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। योजना से करीब 1.68 करोड़ यात्री लाभान्वित हो चुके हैं। नए चरण में सरकार का जोर उन क्षेत्रों तक हवाई सेवाएं पहुंचाने पर है, जहां अभी नियमित हवाई कनेक्टिविटी सीमित है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद महंगा हुआ ईंधन
हवाई किराये में बढ़ोतरी के सवाल पर नायडू ने पश्चिम एशिया में बने संकट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संकट के बाद एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। विमानन मंत्री के मुताबिक एयरलाइन के संचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में बदलाव का सीधा असर विमानन कंपनियों की लागत और टिकट की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, त्योहारी सीजन में यात्रियों की मांग बढ़ने के साथ किराये में तेज वृद्धि एक अलग चुनौती बनी रहती है। आम तौर पर दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के आसपास कई रूटों पर टिकट की कीमतें सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती हैं।
मांग बढ़ते ही टिकट महंगे होने की चुनौती
सरकार हर साल त्योहारों के दौरान एयरलाइंस से किराये को नियंत्रण में रखने की अपील करती है। लेकिन निजी एयरलाइंस के किराये पर सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण सीमित है। विमान टिकट की कीमतें मांग, उपलब्ध सीटों, परिचालन लागत और अन्य बाजार परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। यही वजह है कि छुट्टियों और त्योहारों के दौरान किसी खास रूट पर यात्रियों की संख्या बढ़ते ही टिकट महंगे हो सकते हैं। सरकार का जोर फिलहाल एयरलाइंस के साथ संवाद के जरिए यात्रियों को राहत देने पर है।
अदाणी समूह की एयरलाइन पर अभी फैसला नहीं
अदाणी समूह की ओर से एयरलाइन शुरू करने की संभावित योजना पर भी नायडू ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। मंत्रालय इस बात की समीक्षा कर रहा है कि किसी एक समूह का हवाई अड्डे और एयरलाइन, दोनों क्षेत्रों में एक साथ होना किस तरह के अवसर और संभावित जोखिम पैदा कर सकता है। मंत्री ने कहा कि देश में अधिक एयरलाइंस होने से यात्रियों के पास विकल्प बढ़ेंगे और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, यदि कोई कंपनी हवाई अड्डा और एयरलाइन दोनों संचालित करती है तो संभावित हितों के टकराव और किसी भी अनियमितता से निपटने के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा।