नई वोटर लिस्ट बनने तक पुरानी सूची को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर कई अहम सवाल उठाए हैं। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया ऐसी नहीं हो सकती, जिससे नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट फाइनल होने से पहले ही नागरिक मौजूदा मतदाता सूची से प्रभावी रूप से बाहर हो जाएं।;
पणजी। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर कई अहम सवाल उठाए हैं। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया ऐसी नहीं हो सकती, जिससे नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट फाइनल होने से पहले ही नागरिक मौजूदा मतदाता सूची से प्रभावी रूप से बाहर हो जाएं।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि सभी पात्र भारतीय नागरिकों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करना आयोग की जिम्मेदारी है।
बेंच ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नागरिकों के नाम सूची से हट रहे हैं, तो इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य क्या है?
सुनवाई के दौरान अदालत ने रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 का भी जिक्र किया। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर के तहत तैयार की जा रही ड्राफ्ट मतदाता सूची के फाइनल होने तक मौजूदा मतदाता सूची प्रभावी रहती है।
जस्टिस मेनेजेस ने कहा कि चुनाव आयोग भले ही यह कह रहा हो कि फिलहाल केवल ड्राफ्ट मतदाता सूची पर विचार किया जा रहा है, लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया का असर मौजूदा वोटर लिस्ट पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।
अदालत ने टिप्पणी की कि एसआईआर के जरिए लोगों को ड्राफ्ट रोल से नहीं, बल्कि प्रभावी रूप से मौजूदा वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। बेंच ने चुनाव आयोग की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि एसआईआर प्रक्रिया जारी होने के कारण मौजूदा मतदाता सूची को देखने की जरूरत नहीं है और केवल ड्राफ्ट रोल पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जस्टिस मेनेजेस ने स्पष्ट कहा, “हम मौजूदा सूची को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”
हाईकोर्ट ने ऐसे मतदाताओं का मुद्दा भी उठाया, जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया है और फॉर्म 8 के जरिए अपना पता अपडेट करवाना चाहते हैं।
जस्टिस मेनेजेस ने सवाल उठाया कि अगर किसी मतदाता का नाम पहले से मतदाता सूची में मौजूद है, तो सिर्फ इसलिए उसे फॉर्म 6 भरने के लिए क्यों कहा जाए, क्योंकि एसआईआर के दौरान तैयार ड्राफ्ट रोल में उसका नाम दिखाई नहीं दे रहा है।
फॉर्म 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए नाम को शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि अदालत के सामने उठाया गया प्रश्न ऐसे लोगों से संबंधित था जो पहले से मतदाता हैं, लेकिन अपना पता बदलना चाहते हैं।
बेंच ने एसआईआर के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे प्री-फील्ड एनुमेरशन फॉर्म की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया।
अदालत के मुताबिक इसमें मतदाता को यह घोषणा करनी होती है कि वह मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज पते पर ही रह रहा है। ऐसे में अगर कोई मतदाता अपना निवास स्थान बदल चुका है, तो उसके सामने समस्या पैदा हो सकती है।
जस्टिस मेनेजेस ने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति ने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो क्या उसे प्री-फील्ड एनुमरेशन फॉर्म जमा करते समय गलत घोषणा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है? अदालत ने कहा कि ऐसे मतदाता को अपना पता बदलने के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
अदालत ने सवाल किया कि मतदाताओं को प्री-फील्ड एनुमरेशन फॉर्म दाखिल करने के लिए कहने के बजाय सीधे फॉर्म 8 जमा करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती। बेंच ने कहा कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो मौजूदा वोटर लिस्ट में दर्ज पते पर अब नहीं रहता है, उससे यह प्रमाणित करने की उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अब भी उसी पते पर रह रहा है।
कोर्ट की टिप्पणी के मुताबिक, नागरिकों को अपने मताधिकार को बनाए रखने या वोटर लिस्ट में जानकारी अपडेट करवाने के लिए ऐसी प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए जिसमें उन्हें गलत घोषणा करनी पड़े।
गोवा बेंच की सुनवाई में मुख्य रूप से यह सवाल सामने आया कि एसआईआर के दौरान उन मौजूदा मतदाताओं के अधिकारों को कैसे सुरक्षित रखा जाए, जिनका पता बदल चुका है या जिनका नाम नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिखाई नहीं दे रहा है।
अदालत की टिप्पणियों का मुख्य केंद्र यह रहा कि नई मतदाता सूची फाइनल होने तक मौजूदा वोटर लिस्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और पहले से पंजीकृत मतदाताओं को अपने विवरण में बदलाव के लिए व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।
साथ ही हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान पता बदलने वाले मतदाता को फॉर्म 8 का विकल्प मिलने के बजाय ऐसी घोषणा करने के लिए क्यों कहा जाए, जो उसकी वास्तविक निवास स्थिति के अनुरूप न हो।