नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान देश की एकता, सामाजिक समरसता, विकास और वैश्विक परिस्थितियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है। भागवत ने दावा किया कि भारत में भी फ्रांस और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन और तनाव बढ़ाना। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक एकता, हिंदू समाज के संगठन, पर्यावरण संरक्षण, तकनीक और भारतीय संस्कृति के महत्व पर भी चर्चा की।
बंटने के कारण कमजोर हुआ भारत: भागवत
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की सभ्यता और सनातन दृष्टिकोण ने समाज को विविधताओं के बावजूद एकजुट रखने का काम किया है। संत रविदास की 650वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास ने कठिन परिस्थितियों में स्वधर्म निष्ठा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। उनके विचारों ने समाज का मनोबल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भागवत के अनुसार, जब भारतीय समाज में भावनात्मक एकता और राष्ट्रीयता की भावना सर्वोपरि रही, तब देश ने दुनिया के सामने आदर्श प्रस्तुत किए। लेकिन जब लोगों ने अपने आपसी जुड़ाव को भुलाकर भाषा, जाति, संप्रदाय और समुदाय के आधार पर खुद को अलग करना शुरू किया, तो समाज कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन से लोगों के भीतर भय बढ़ा और समाज ने खुद को सीमित करना शुरू कर दिया।
दुनिया का ध्यान भारत की ओर
भागवत ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ दुनिया की दिलचस्पी भी देश के प्रति बढ़ रही है। उन्होंने पश्चिमी देशों की जीवनशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भौतिकवाद, व्यक्तिवाद और बेलगाम उपभोग पर आधारित व्यवस्था कई सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, विभिन्न समुदायों के बीच अपनापन कैसे बढ़ाया जाए और परिवारों में मूल्यों के क्षरण को किस तरह रोका जाए। उनके मुताबिक, भारतीय संस्कृति और जीवनदृष्टि में इन समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता है।
रिजीम चेंज न हुआ, न आगे होगा
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।'
आंदोलन समाधान के लिए हों
दुनिया के विभिन्न देशों में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि पश्चिम से आने वाले प्रभावों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया में हो रही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका मकसद समस्याओं का समाधान होना चाहिए। भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए लोगों को उकसाते हैं और आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए करते हैं। उन्होंने समाज की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
एकता बनाए रखने की अपील
RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया में कुछ शक्तियां भारत को कमजोर करना चाहती हैं, इसलिए देश के लोगों को उनके प्रभाव में आकर उत्तेजित होने से बचना चाहिए। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल विभाजन का उल्लेख किया और कहा कि लॉर्ड कर्जन की ओर से किया गया विभाजन बाद में वापस लेना पड़ा था। भागवत ने 1947 में हुए देश के विभाजन का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जब समाज में यह सोच मजबूत हो गई कि अलग पहचान रखने वाले लोग अलग ही हैं, तब देश का विभाजन रोकना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को एकता के सूत्र में बंधे रहना चाहिए और अलग-अलग पहचानों का सम्मान करते हुए साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कैप्टन स्मित मच्छार के कार्य का किया उल्लेख
अपने संबोधन में भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मच्छार ने हाल ही में जो किया, वह उनके संस्कारों और परंपराओं से प्रेरित स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। भागवत के मुताबिक, परीक्षा की घड़ी में व्यक्ति के भीतर मौजूद मूल्य और संस्कार उसके व्यवहार में सामने आते हैं। हालांकि, संबोधन में इस संदर्भ की विस्तृत परिस्थितियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
भागवत ने विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण और नैतिक मूल्यों को महत्व देने की बात कही। नेपाल में बाढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक और आर्थिक प्रगति आवश्यक हैं, लेकिन इनके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने ऐसे विकास मॉडल की वकालत की, जिसमें अर्थव्यवस्था के साथ पारिस्थितिकी और नैतिकता का भी ध्यान रखा जाए। उनके मुताबिक, विकास का लक्ष्य केवल आर्थिक समृद्धि हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना भी होना चाहिए।
OTT और AI के इस्तेमाल पर जताई चिंता
डिजिटल माध्यमों का जिक्र करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि आज लोगों तक बड़ी मात्रा में सूचनाएं पहुंच रही हैं, लेकिन सही और गलत के बीच अंतर किए बिना उनका इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नियमों और निगरानी की जरूरत बताई। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। भागवत ने कहा कि तकनीक का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए और इसके संभावित दुष्प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कई प्रमुख हस्तियां कार्यक्रम में हुईं शामिल
नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।