IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद बड़ा फैसला, डीन दूल्ला की डीनशिप निलंबित, संस्थान ने पुराने बयान पर मांगी माफी

साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की ओर से संस्थान के सामने कई मांगें भी रखी गई हैं। छात्रों ने कुल 18 मांगों वाले दस्तावेज में जांच और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।;

Update: 2026-09-21 08:38 GMT

मुंबई: आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने सोमवार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया। आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की डीनशिप तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। यह निर्णय संस्थान के निदेशक शिरीष बी. केदारे ने लिया। दूल्ला वही प्रोफेसर हैं, जो साहिल की मध्यावधि परीक्षा के दौरान निरीक्षक की भूमिका में थे। इस बीच, आईआईटी बॉम्बे ने साहिल की मौत से पहले की घटनाओं को लेकर अपने पहले के आधिकारिक बयान पर भी माफी मांगी है। संस्थान ने कहा है कि घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच अभी संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है और जांच पूरी होने से पहले घटनाक्रम को किसी एक निश्चित रूप में पेश करना उचित नहीं था।

पुराने बयान पर संस्थान ने मांगी माफी

साहिल की मौत के बाद 19 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे ने एक बयान जारी किया था। इसमें संस्थान ने कहा था कि परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था और उसने कथित तौर पर ChatGPT पर प्रश्नपत्र अपलोड करने की कोशिश की थी। अब संस्थान ने अपने उस संचार पर खेद जताया है। आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि घटना से पहले की परिस्थितियां और उनसे जुड़े तथ्य संबंधित अधिकारियों की जांच के दायरे में हैं। ऐसे में जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि से पहले घटना के बारे में निश्चित निष्कर्ष के तौर पर जानकारी देना उचित नहीं था। संस्थान ने साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में अपने पहले के संचार में दिए गए बयानों के लिए औपचारिक रूप से माफी भी मांगी है।

डीनशिप निलंबित, फैकल्टी फोरम ने किया समर्थन

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की डीनशिप निलंबित किए जाने के बाद आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने उनका समर्थन किया है। फोरम का कहना है कि दूल्ला परीक्षा के दौरान संस्थान की निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। साहिल की मौत के बाद दूल्ला के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है।

साहिल के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

साहिल के माता-पिता ने 19 सितंबर को प्रोफेसर दूल्ला सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को जातिसूचक टिप्पणियों और कथित मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। शिकायत में आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे, कुछ फैकल्टी सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि साहिल के साथ कथित उत्पीड़न संस्थान के वरिष्ठ स्तर के निर्देशों के तहत हुआ। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, क्राइम ब्रांच मामले में आरोपी प्रोफेसर और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है।

छात्रों ने रखीं 18 मांगें

साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्रों की ओर से संस्थान के सामने कई मांगें भी रखी गई हैं। छात्रों ने कुल 18 मांगों वाले दस्तावेज में जांच और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। छात्रों की मांगों में निदेशक, संबंधित डीन और अन्य अधिकारियों के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की बात शामिल है, ताकि छात्र घटना से जुड़े सवाल सीधे रख सकें। छात्रों ने संस्थान से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है। उनका आरोप है कि साहिल के बारे में संस्थान की एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट में अधूरी जानकारी के कारण उसकी छवि प्रभावित हुई। छात्रों ने इस वर्ष संस्थान में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी है। दस्तावेज में मांगों की प्रगति को लेकर नियमित अपडेट देने की बात कही गई है।

निदेशक के इस्तीफे की खबर पर संस्थान की सफाई

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आईआईटी बॉम्बे के निदेशक के इस्तीफे की खबरें भी सामने आईं। संस्थान ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर स्पष्ट किया कि निदेशक शिरीष बी. केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है और इस संबंध में चल रही खबरों को गलत बताया। इससे पहले प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच केदारे ने कथित तौर पर कहा था कि वह इस्तीफा देंगे, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और सोमवार की बैठक के बाद वह अपना निर्णय बताएंगे। बाद में संस्थान की ओर से निदेशक के इस्तीफे की खबरों का खंडन किया गया।

जांच पर टिकी आगे की कार्रवाई

22 वर्षीय साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सेकेंड ईयर के छात्र थे। 18 सितंबर की रात वह पवई परिसर स्थित हॉस्टल में मृत पाए गए थे। घटना के बाद संस्थान में छात्रों के बीच विरोध और प्रशासन से जवाबदेही की मांग तेज हुई। अब इस मामले में दो स्तरों पर जांच महत्वपूर्ण है। एक ओर पुलिस कथित उत्पीड़न और परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है, वहीं संस्थान ने भी अपने पहले के बयान से पीछे हटते हुए कहा है कि घटना की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।

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