रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग मामले में बेरोजगार युवाओं का हिंदुत्व का लालच देकर किया ब्रेनवॉश, बिश्नोई गैंग की 12 गिरफ्तारियां

1 फरवरी की रात करीब 12:45 बजे जुहू इलाके में स्थित नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर कम से कम पांच गोलियां चलाई गईं। यह इमारत रोहित शेट्टी का आवासीय परिसर है। घटना के दौरान चली एक गोली इमारत के अंदर स्थित जिम के शीशे को लगी।

Update: 2026-02-18 10:00 GMT
मुंबई। Rohit Shetty Firing Case: मशहूर बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर हुई फायरिंग की घटना ने फिल्म इंडस्ट्री और सुरक्षा एजेंसियों दोनों को झकझोर दिया है। 1 फरवरी की रात हुई इस वारदात की जांच में अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मुंबई क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिनसे इस साजिश के पीछे संगठित अपराध गिरोह की गहरी साजिश का संकेत मिल रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड शुभम लोनकर (Shubham Lonkar) है, जो लॉरेंस बिश्नोई गिरोह (Lawrence Bishnoi gang) से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि लोनकर ने आरोपी विष्णु कुशवाहा के साथ मिलकर न केवल शूटरों की भर्ती की, बल्कि उनका ब्रेनवॉश भी किया।

1 फरवरी की रात: कैसे हुई फायरिंग?

1 फरवरी की रात करीब 12:45 बजे जुहू इलाके में स्थित नौ मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर कम से कम पांच गोलियां चलाई गईं। यह इमारत रोहित शेट्टी का आवासीय परिसर है। घटना के दौरान चली एक गोली इमारत के अंदर स्थित जिम के शीशे को लगी। फायरिंग के वक्त परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए शुभम लोनकर ने इस गोलीबारी की जिम्मेदारी ली। पुलिस के मुताबिक, लोनकर इस मामले में वांछित आरोपी है और उसकी तलाश जारी है।

गिरफ्तारी में यूपी-हरियाणा कनेक्शन

मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई आरोपी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से पकड़े गए हैं। जांच में सामने आया है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए अलग-अलग राज्यों से युवाओं को जोड़ा गया। क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी विष्णु कुशवाहा ने यूपी और हरियाणा से कम से कम छह युवकों को रिक्रूट किया। इनमें दीपक शर्मा, सनी कुमार और सोनू कुमार जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन युवाओं को मोटी रकम का लालच देकर इस साजिश में शामिल किया गया।

पैसों का लालच और ‘ब्रेनवॉश’ की साजिश

जांच अधिकारियों के मुताबिक, शुभम लोनकर ने पैसे विष्णु कुशवाहा को भेजे, जिसके बाद कुशवाहा ने शूटरों की भर्ती की। आरोप है कि उन्हें काम पूरा होने के बाद लाखों रुपये देने का वादा किया गया था। क्राइम ब्रांच को मिली जानकारी के अनुसार, भर्ती किए गए युवाओं का न केवल आर्थिक लालच के जरिए इस्तेमाल किया गया, बल्कि उन्हें वैचारिक रूप से भी प्रभावित किया गया। विष्णु पर आरोप है कि उसने हिंदुत्व और धर्म से जुड़े बड़े-बड़े दावे कर युवाओं का ब्रेनवॉश किया, ताकि वे इस घटना को ‘मिशन’ की तरह अंजाम दें। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन युवाओं को पहले से किसी तरह का प्रशिक्षण दिया गया था।

पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग का शक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फायरिंग से पहले शूटर दीपक शर्मा को पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दिए जाने का संदेह है। हालांकि यह प्रशिक्षण कहां और किस स्थान पर दिया गया, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस संबंध में मुंबई क्राइम ब्रांच और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीमें मिलकर जांच कर रही हैं। संभावित ट्रेनिंग लोकेशन और संबंधित लोगों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

बिश्नोई गैंग का तरीका

जांच में यह भी सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई गिरोह बेरोजगार युवाओं को टारगेट करने की रणनीति अपनाता है। उन्हें मोटे पैसों का लालच देकर छोटे-बड़े अपराधों में शामिल किया जाता है। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में भी यही पैटर्न सामने आया है। आरोपी विष्णु कुशवाहा पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में बिश्नोई गैंग के लिए सक्रिय था। वह ऐसे युवाओं की तलाश करता था जो पहले से सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील या फोटो पोस्ट करते हों और अपराधी छवि से प्रभावित हों। गिरफ्तार किए गए कई आरोपी सोशल मीडिया पर कट्टों और बंदूकों के साथ वीडियो साझा करते थे, जिससे उनकी पहचान गैंग के लिए आसान हो गई।

टारगेट की पूरी जानकारी थी शूटरों को

क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किए गए सातों आरोपियों को यह पता था कि उनका टारगेट कौन है। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि फायरिंग रोहित शेट्टी के घर पर करनी है। फायरिंग के बाद जब मुख्य शूटर और उसके दो साथी आगरा पहुंचे और फिर वहां से नोएडा गए, तो उन्हें पनाह देने वाले जतिन और विशाल को भी घटना की जानकारी थी। पुलिस का दावा है कि इन दोनों को पता था कि आरोपी मुंबई में फायरिंग कर आए हैं।

फोन बंद रखकर बचने की कोशिश

घटना को अंजाम देते समय सभी आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद रखे थे। यही वजह है कि पुलिस को उनकी लोकेशन ट्रैक करने में काफी समय लगा। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया गतिविधियों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को जोड़कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

मकोका की धाराएं लागू

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की कड़ी धाराएं लगाई हैं। मकोका के तहत कार्रवाई होने का मतलब है कि पुलिस इसे संगठित अपराध की श्रेणी में मान रही है। इस कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है और जांच एजेंसियों को विस्तृत पूछताछ तथा संपत्ति की जांच जैसे अधिकार मिलते हैं।

शुभम लोनकर अब भी फरार

इस पूरे मामले में शुभम लोनकर को मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। उसने कथित तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी। फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में कई राज्यों में छापेमारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, लोनकर की गिरफ्तारी इस केस में कई और बड़े खुलासे करा सकती है।

फिल्म इंडस्ट्री में सुरक्षा को लेकर चिंता

इस घटना के बाद फिल्म इंडस्ट्री में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पहले भी कुछ फिल्मी हस्तियों को धमकियां मिलने के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन किसी निर्देशक के घर पर इस तरह की फायरिंग ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। पुलिस ने रोहित शेट्टी और उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है। साथ ही, अन्य हाई-प्रोफाइल हस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।

जांच और संभावित खुलासे

मुंबई क्राइम ब्रांच, यूपी एसटीएफ और अन्य एजेंसियां इस नेटवर्क के हर पहलू की जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस वारदात के पीछे कोई बड़ा मकसद था या यह केवल दहशत फैलाने की कोशिश थी। अब तक की जांच से यह स्पष्ट है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी। आने वाले दिनों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और फंडिंग ट्रेल की जांच से और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

संगठित अपराध और उसका फैलता नेटवर्क

रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग ने एक बार फिर संगठित अपराध और उसके फैलते नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेरोजगार युवाओं को लालच और वैचारिक प्रभाव के जरिए अपराध की राह पर ले जाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और पूरे देश की नजर इस केस के अगले खुलासों पर टिकी है।

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