ECINet को लेकर महाराष्ट्र CEO की चुनाव आयोग को चिट्ठी, ERO को ज्यादा अधिकार देने की मांग

महाराष्ट्र CEO की चिट्ठी में खास तौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO की भूमिका का मुद्दा उठाया गया है। चोकलिंगम के मुताबिक, मतदाता रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी या विसंगति सामने आने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू करना जरूरी नहीं होना चाहिए।;

Update: 2026-09-29 06:54 GMT

नई दिल्ली: मतदाता सूची से जुड़े चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ECINet को लेकर चुनाव व्यवस्था के भीतर अधिकारों और निर्णय प्रक्रिया का मुद्दा सामने आया है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर सॉफ्टवेयर में चार बदलावों की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय चुनाव अधिकारियों को कानून के तहत मिले अधिकारों के मुताबिक मामलों पर फैसला लेने की पर्याप्त गुंजाइश मिलनी चाहिए। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों की ओर से भी ECINet में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आने की खबरें हैं।

ERO को केस के हिसाब से फैसला लेने का अधिकार देने की मांग

महाराष्ट्र CEO की चिट्ठी में खास तौर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO की भूमिका का मुद्दा उठाया गया है। चोकलिंगम के मुताबिक, मतदाता रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी या विसंगति सामने आने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू करना जरूरी नहीं होना चाहिए। उनका सुझाव है कि ERO को यह तय करने की सुविधा दी जाए कि किसी मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत है या नहीं, किन दस्तावेजों की मांग की जानी है और किन मामलों का निपटारा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकता है।

बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं का भी जिक्र

चिट्ठी में उन मतदाताओं का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना मुश्किल हो सकता है। इसमें बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों के मतदाता शामिल हैं। चोकलिंगम का कहना है कि ऐसे मामलों में हर व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाने के बजाय ERO को परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने का विकल्प मिलना चाहिए। इसके लिए ECINet सॉफ्टवेयर में जरूरी लचीलापन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

SIR के दौरान सामने आ रही ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’

यह मुद्दा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड की तुलना से भी जुड़ा है। इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में अलग-अलग जानकारियां सामने आ सकती हैं। ECINet में ऐसे मामलों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तौर पर चिह्नित किया जाता है। इनमें माता-पिता के नाम में अंतर, उम्र से जुड़ी असामान्य जानकारी या पुराने और नए रिकॉर्ड के बीच अन्य विसंगतियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे मामलों में ERO को तय करना होता है कि मतदाता से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएं या व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत है। महाराष्ट्र CEO की मांग इसी निर्णय प्रक्रिया को अधिक केस-विशिष्ट बनाने से जुड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चुनाव आयोग से जुड़े मामले की सुनवाई

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़े एक मामले पर भी सुनवाई प्रस्तावित है। दी गई जानकारी के अनुसार, याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले आयोग के निर्णयों पर सवाल उठाए गए हैं। सीनियर वकील विकास सिंह की ओर से यह दलील रखी गई कि आयोग के फैसले कानून के अनुरूप सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने रखा गया है। 

चुनाव आयुक्त भी उठा चुके हैं ECINet से जुड़े सवाल

महाराष्ट्र CEO की चिट्ठी से एक दिन पहले 23 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों में मतदाता सूची, SIR और ECINet से जुड़े फैसले शामिल थे। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर इस बात पर सवाल उठाया था कि मतदाता सूची से जुड़े कानूनी अधिकार स्थानीय अधिकारियों के पास होने के बावजूद सॉफ्टवेयर में उनके लिए पर्याप्त निर्णयात्मक गुंजाइश होनी चाहिए।

EC ने समीक्षा समिति बनाने का फैसला किया

ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच 26 सितंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हुई। बैठक में सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला लिया गया। समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIIT के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि अगर फील्ड अधिकारियों को अधिक लचीलापन देने की जरूरत महसूस होती है तो सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। ऐसे में आने वाले समय में ECINet की कार्यप्रणाली और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका में बदलाव की संभावना पर नजर रहेगी।

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