48 दिन से आंदोलन, 13 दिन अनशन... मुंबई में आदिवासी छात्रों का 'हल्ला बोल', छात्र नेता ने लगाए गंभीर आरोप

महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों का आंदोलन अब राजधानी मुंबई में दस्तक दे चुका है। नासिक के ईदगाह मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन 48 दिनों बाद सियासी हलचल का केंद्र बन गया;

Update: 2026-10-05 17:15 GMT

मुंबई। महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों का आंदोलन अब राजधानी मुंबई में दस्तक दे चुका है। नासिक के ईदगाह मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन 48 दिनों बाद सियासी हलचल का केंद्र बन गया। छात्र नेता सागर पावरा ने प्रशासन पर अनुमति न देने और आंदोलन को दबाने के लिए गिरफ्तारियां करने का आरोप लगाया है। वहीं, आश्रमशालाओं में छात्रों की 'मौत', खराब भोजन और स्कॉलरशिप के नाम पर वसूली जैसे मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए।

आदिवासी छात्र नेता सागर पावरा ने कहा, "48 दिनों से ईदगाह मैदान नासिक में मेरा प्रदर्शन जारी था। पहले दिन से मैं उनके साथ हूं। 13 दिन अनशन पर था, उसे खत्म करने के बाद हम 42 दिनों के लिए धरना पर बैठे थे। 28 सितंबर को हम नासिक से निकले। मैंने खुद आकर परमिशन लेनी चाही, मैं 3-4 अक्टूबर तक घूमता ही रहा। पुलिस स्टेशन में चार घंटे बैठा रहा, ताकि अनुमति मिल जाए। वो लिखित में भी कुछ नहीं दे रहे थे।"

उन्होंने कहा कि जब बच्चे पहुंच गए, तो हमारे पास रहने की जगह नहीं थी। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता से संपर्क हुआ, उन्होंने बोला कि वो रहने के लिए जगह और खाना-पानी भी दे सकते हैं। इसके बाद फिर हमने बच्चों को इधर शिफ्ट किया।

सागर पावरा ने आगे कहा कि हमारे पास मुंबई में रहने लायक पैसे नहीं हैं। उन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हमारी है। इसलिए हमने तिलक भवन में रहने की सोची। पुलिस सुबह में पहुंच गई थी और तीन लड़कियों को डिटेन किया। हमारे स्टूडेंट जहां-जहां दिख रहे हैं, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन, हर जगह से उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की गई। 500 से अधिक को गिरफ्तार भी किया गया। हमारी मांग बस इतनी है कि हमारी जो मूलभूत शैक्षणिक अधिकार है, जो संविधान ने दिए हैं, उसी को लेकर हम अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

आदिवासी छात्र नेता ने कहा कि पिछले दो सालों में हमारे जिन बच्चों की मौत हुई, इसके लिए जो भी जिम्मेदार व्यक्ति है, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। इतने सारे बच्चों की मौत के बाद आदिवासी विकास मंत्री को इस्तीफा देनी चाहिए। अन्य अधिकारियों को निलंबित करें और सेंट्रलाइज्ड किचन से खाना बनाकर 80-100 किमी तक भेज रहे हैं, वो खाने लायक नहीं बच रहा है, उस सेंट्रलाइज्ड किचन को बंद करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो बच्चे पढ़ रहे हैं, उन्हें छात्रवृत्ति मिल रही है। छात्रवृत्ति में साफ लिखा गया है कि इनसे एक भी रुपए कोई नहीं ले सकता है, फिर भी एक-डेढ़ लाख रुपए डोनेशन के नाम पर लिए जा रहे हैं। अगर पैसे ना दो तो कॉलेज वाले डॉक्यूमेंट्स नहीं दे रहे। उनको धमकियां दी जा रही है कि अगर पैसे नहीं दिए तो दस्तावेज नहीं मिलेगा।

Tags:    

Similar News