महाराष्ट्र : अजित पवार के सहयोग को अब 'बड़ा धोखा' मान रही भाजपा
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एनसीपी नेता अजित पवार से हाथ मिलाकर रातोंरात सरकार बनाने को भाजपा अपने साथ हुआ 'बड़ा धोखा' मान रही है
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एनसीपी नेता अजित पवार से हाथ मिलाकर रातोंरात सरकार बनाने को भाजपा अपने साथ हुआ 'बड़ा धोखा' मान रही है।
भाजपा को लग रहा है कि उसने राकांपा में शरद पवार के आगे भतीजे अजित पवार की हैसियत का आंकलन करने में भारी चूक की, जिससे लेने के देने पड़ गए। महाराष्ट्र के नेता जहां अब खुलकर इस मुद्दे पर राय जाहिर करने लगे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर के नेता भी दबी जुबान ऐसा ही मान रहे हैं। दो तिहाई विधायक अपने साथ होने का दावा कर अचानक अजित पवार के हाथ मिलाने के पीछे छुपी किसी चाल से भी भाजपा के नेता इनकार नहीं कर रहे हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, "अजित पवार के हाव-भाव देखिए, सब पता चल जाएगा। पहले बगावत कर भाजपा की सरकार बनवाई और फिर इस्तीफा देकर पार्टी और परिवार में ऐसे सहज होकर चले गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो। परिवार का रुख अजित पवार को लेकर हमेशा नरम रहा।"
हालांकि भाजपा का एक धड़ा अजित पवार पर शक जाहिर करने को गलत मानता है। यह वह धड़ा है, जो महाराष्ट्र में भाजपा की अचानक सरकार बनाने की पटकथा लिखने में शामिल रहा। इस धड़े के नेताओं का कहना है कि अजित पवार के साथ उनके भरोसेमंद साथियों ने ही खेल कर दिया। वादा करके भी विधायक साथ आए नहीं, मरता क्या नहीं करता और राजनीति बचाने की गरज से अजित के पास वापस लौटने के सिवा कोई चारा नहीं था।
महाराष्ट्र में भाजपा नेता और पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री एकनाथ खड़से ने बुधवार को यह कहकर पार्टी के अंदरखाने छिपे अंसतोष को बाहर ला दिया कि सिंचाई घोटाले के आरोपी अजित पवार के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था। हालांकि बाद में उन्होंने इसे उन्होंने अपनी निजी राय करार दिया।
भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस से महाराष्ट्र के पूरे घटनाक्रम को 'मुफ्त में बदनाम' होना करार दिया। उन्होंने कहा कि जब 28-29 दिन बीत गए थे तो फिर और इंतजार करने में बुराई नहीं थी। यह तय है कि तीन पहिए की सरकार नहीं चलने वाली। कर्नाटक में एक बार जल्दबाजी की सरकार बनाने का हश्र हम देख चुके हैं। वहां भी सुबह-सुबह शपथ हुई थी और दो दिन बाद ही गिर गई। बाद में कांग्रेस-जद (एस) ने सरकार बनाई मगर चल न सकी। अब कर्नाटकर में येदियुरप्पा आराम से सरकार चला रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा, "कांग्रेस सरकार बनने तो देती है मगर चलने नहीं देती। लेकिन पार्टी ने अजित पवार की औकात जाने बिना अचानक सरकार बनाने का बड़ा खतरा मोल ले लिया। आखिरकार बहुमत की व्यवस्था न देने पर मैदान छोड़ना पड़ा।"
भाजपा नेता ने कहा, भाजपा को हास्यास्पद स्थिति में लाकर अजित पवार अब परिवार में जाकर गले मिलन कर रहे हैं। बातों से ऐसे लग रहा है, जैसे खेल खेलने आए थे। इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा का चौतरफा नुकसान हो गया। शिवसेना की दगाबाजी से जनता की इतने दिनों से उपजी भाजपा के प्रति सहानुभूति एक झटके में खत्म हो गई। रातोंरात सरकार बनाने पर संवैधानिक कुर्सियों पर बैठे व्यक्तियों पर भी हमला करने का विपक्ष को हथियार मिल गया। आगे के चुनावों पर भी असर पड़ सकता है।