त्विषा की मौत के बाद सास गिरिबाला ने लगाया था बड़े पुलिस अधिकारियों को फोन, न्यायालय को सौंपी कॉल डिटेल

अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, त्विषा की मौत 12 मई की रात हुई थी। इसके बाद 12 और 13 मई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कई प्रभावशाली अधिकारियों से फोन पर बातचीत की थी। पीड़ित पक्ष ने कॉल डिटेल के आधार पर दावा किया है कि उन्होंने हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश से चार बार बात की।;

Update: 2026-11-01 07:58 GMT

जबलपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अभिनेत्री और मॉडल रही 33 वर्षीय त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में आरोपित उनकी सास और सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका का पीड़ित पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कड़ा विरोध किया है। त्विषा के परिजनों की ओर से अदालत में 56 पन्नों के दस्तावेज पेश किए गए हैं। इनमें आरोप लगाया गया है कि त्विषा की मौत के बाद गिरिबाला ने कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया था। दस्तावेजों में 12 और 13 मई की कॉल डिटेल का हवाला दिया गया है। परिजनों का कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए गिरिबाला को जमानत देना जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मौत के बाद अधिकारियों से संपर्क करने का आरोप

अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, त्विषा की मौत 12 मई की रात हुई थी। इसके बाद 12 और 13 मई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कई प्रभावशाली अधिकारियों से फोन पर बातचीत की थी। पीड़ित पक्ष ने कॉल डिटेल के आधार पर दावा किया है कि उन्होंने हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश से चार बार बात की। इसके अलावा भोपाल में पदस्थ एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश से 12 बार और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के एक अधिकारी से चार बार फोन पर संपर्क किया गया। दस्तावेजों में महानिदेशक स्तर के एक आईपीएस अधिकारी से छह बार बातचीत और एक अन्य अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से एक बार संपर्क किए जाने का भी उल्लेख है। त्विषा के परिजनों ने इन फोन कॉल को जमानत का विरोध करने के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया है। उनका तर्क है कि घटना के तुरंत बाद वरिष्ठ अधिकारियों से इस तरह संपर्क किए जाने की परिस्थितियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

एम्स में परिवार के साथ न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी का दावा

जमानत याचिका के विरोध में पेश आपत्ति में एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि 12 और 13 मई की दरमियानी रात संबंधित न्यायिक अधिकारी एम्स भोपाल में गिरिबाला के परिवार के साथ मौजूद थे। इस दावे के समर्थन में आरोपित परिवार के वाट्सएप समूह में 20 मई को भेजे गए एक संदेश का हवाला दिया गया है। परिजनों ने अदालत के सामने इस तथ्य को रखते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता और संभावित प्रभावों पर सवाल उठाए हैं।

ब्यूटी पार्लर संचालिका से भी पूछताछ का आरोप

मामले में पेश दस्तावेजों का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा ब्यूटी पार्लर से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, 13 मई को गिरिबाला ने एक ब्यूटी पार्लर की संचालिका को फोन किया था। बातचीत के दौरान उन्होंने त्विषा के 12 मई को पार्लर पहुंचने का समय, वहां भुगतान किस माध्यम से किया गया था और पार्लर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बारे में जानकारी मांगी थी। सीबीआई को दिए गए अपने बयान में पार्लर संचालिका ने इस फोन कॉल की पुष्टि की है। दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि बाद में कुछ लोग पार्लर पहुंचे और वहां से सीसीटीवी फुटेज हासिल करने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष का मानना है कि घटना के बाद पार्लर से संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए इन तथ्यों को जमानत याचिका के विरोध में अदालत के सामने रखा गया है।

सीबीआई ने सास और पति के खिलाफ दाखिल किया आरोपपत्र

त्विषा शर्मा की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। जांच एजेंसी ने इस प्रकरण में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे तथा त्विषा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। पीड़ित पक्ष ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलने पर वह अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर जांच या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसी आशंका के आधार पर परिजनों ने जमानत देने का विरोध किया है।

हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

जबलपुर हाई कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें और पीड़ित पक्ष की ओर से पेश दस्तावेजों पर विचार किया गया। अदालत ने फिलहाल गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के अंतिम आदेश पर है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि आरोपित पूर्व जिला जज को इस स्तर पर जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। दूसरी ओर, त्विषा के परिजन मामले से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

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