भोपाल: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी शिक्षा संस्थानों में शामिल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इसके तहत आरजीपीवी को तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में बांटने की योजना है। इस फैसले के बाद भोपाल स्थित आरजीपीवी का नाम बदलकर मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय किए जाने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रदेश के बड़े भौगोलिक क्षेत्र और तकनीकी शिक्षा से जुड़े संस्थानों के बेहतर प्रशासन को ध्यान में रखकर किया गया है। वहीं, कांग्रेस ने विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि नाम बदलने से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याएं दूर नहीं होंगी।
कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आरजीपीवी के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के मौजूदा स्वरूप को तीन प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में विभाजित किया जाएगा। सरकार के अनुसार, आरजीपीवी से जुड़े कॉलेजों और विद्यार्थियों की संख्या तथा प्रदेश के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए प्रशासनिक ढांचे में बदलाव जरूरी महसूस किया गया। नए विश्वविद्यालय बनने के बाद संबद्ध कॉलेजों, विद्यार्थियों और तकनीकी शिक्षा से जुड़े कामकाज को अधिक क्षेत्रीय स्तर पर संचालित किया जा सकेगा।
नाम बदलने पर कांग्रेस का विरोध
विश्वविद्यालय का नाम बदलने के फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे भाजपा सरकार की संकीर्ण मानसिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को नाम बदलने के बजाय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि देश में सूचना क्रांति और कंप्यूटर युग की शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नए काम करने के बजाय संस्थानों के नाम बदलने में ज्यादा रुचि दिखा रही है।
'नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलता'
कमल नाथ ने कहा कि किसी संस्थान का नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हर फैसले का राजनीतिक और सामाजिक हिसाब होता है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया था और देश की तकनीकी प्रगति में उनका योगदान रहा है। सिंघार ने सवाल किया कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से छात्रों के भविष्य और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को क्या लाभ मिलेगा।
छात्रों और कॉलेजों पर पड़ेगा असर
आरजीपीवी का पुनर्गठन होने के बाद विश्वविद्यालय से संबद्ध तकनीकी कॉलेजों और विद्यार्थियों की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव आएगा। अभी बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग, फार्मेसी और अन्य तकनीकी संस्थान आरजीपीवी से जुड़े हैं। तीन विश्वविद्यालयों के गठन के बाद इन संस्थानों का क्षेत्रीय बंटवारा किए जाने की संभावना है। सरकार का तर्क है कि इससे प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर की सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेंगी। हालांकि, नए विश्वविद्यालयों की संरचना, उनके अधिकार क्षेत्र और संबद्ध कॉलेजों के अंतिम बंटवारे की विस्तृत जानकारी आगे जारी की जानी है।
सियासी बहस के बीच शिक्षा सुधार की चुनौती
आरजीपीवी के पुनर्गठन के फैसले ने मध्य प्रदेश में शिक्षा और राजनीति दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सरकार इसे तकनीकी शिक्षा के प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस नाम परिवर्तन को मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रही है। अब चुनौती यह होगी कि तीन नए विश्वविद्यालयों के गठन की प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाती है और इसका विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा संबद्ध कॉलेजों पर क्या प्रभाव पड़ता है। आने वाले समय में नए संस्थानों की प्रशासनिक संरचना और कार्यक्षेत्र को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।