राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर बोला हमला, कहा- इंदौर को जहर और मातम का शहर बना दिया
राहुल गांधी ने वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर लिखा कि इंदौर की घटना सरकारी लापरवाही का कत्लनामा है। स्मार्ट सिटी के झूठ ने इंदौर को जहर और मातम का शहर बना दिया है। मैं इंदौर में उन परिवारों से मिला, जिनके घरों में जहरीले पानी ने चूल्हे ही नहीं, चिराग तक बुझा दिए। इंदौर जवाब मांगता है, देश जवाब मांगता है।”
इंदौर/नई दिल्ली। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मॉडल को सीधे निशाने पर लेने की तैयारी कर ली है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस त्रासदी पर एक वीडियो जारी करते हुए इसे “सरकारी लापरवाही का कत्लनामा” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के दावों के बीच इंदौर को “जहर और मातम का शहर” बना दिया गया।
राहुल गांधी ने वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर लिखा कि इंदौर की घटना सरकारी लापरवाही का कत्लनामा है। स्मार्ट सिटी के झूठ ने इंदौर को जहर और मातम का शहर बना दिया है। मैं इंदौर में उन परिवारों से मिला, जिनके घरों में जहरीले पानी ने चूल्हे ही नहीं, चिराग तक बुझा दिए। इंदौर जवाब मांगता है, देश जवाब मांगता है।”
भागीरथपुरा दौरे के बाद जारी हुआ वीडियो
राहुल गांधी ने 17 जनवरी को इंदौर के भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया था। उसी दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों और स्थानीय रहवासियों से मुलाकात की थी। इसके बाद अब उन्होंने आठ मिनट 11 सेकंड का वीडियो जारी किया है, जिसका शीर्षक रखा गया है—‘इंदौर त्रासदी: जल या जहर?’ वीडियो में राहुल गांधी भागीरथपुरा के रहवासियों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान दूषित पानी पीने से मारे गए लोगों के स्वजन अपनी पीड़ा और गुस्सा खुलकर जाहिर करते नजर आते हैं। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने न सिर्फ समय पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि मौतों की संख्या भी छिपाने की कोशिश की।
‘मौतें भी छुपाई गईं, जिम्मेदारों ने आंख मूंद ली’
वीडियो में एक दंपती राहुल गांधी से कहते हैं कि इस पूरे मामले में मौतें तक छिपाई गईं। उनका दावा है कि कई मृतकों को रातों-रात उनके गांव भेज दिया गया, ताकि आंकड़े सामने न आ सकें। भागीरथपुरा निवासी जीवनलाल बरड़े के पुत्र ने राहुल गांधी को बताया कि 22 दिसंबर को पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। रात में डायरिया जैसे लक्षण हुए। सुबह अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में दूषित पानी की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं। लोगों ने स्थानीय पार्षद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों तक को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन किसी ने समय रहते सुध नहीं ली।
29 दिसंबर के बाद जागा प्रशासन
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि 29 दिसंबर को जब एक साथ बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे और मीडिया में मामला उछला, तब जाकर प्रशासन की नींद खुली। उससे पहले तक हालात पर पर्दा डालने की कोशिश होती रही। राहुल गांधी के वीडियो के साथ यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि जब इंदौर में करीब 15 मौतें हो चुकी थीं, तब प्रशासन केवल चार मौतों को ही स्वीकार कर रहा था। बाद में राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ने पर डेथ ऑडिट कराया गया।
डेथ ऑडिट और मौतों का विवादित आंकड़ा
डेथ ऑडिट की रिपोर्ट में कुल 21 मौतों को रिकॉर्ड पर लिया गया। इनमें से भी प्रशासन ने सिर्फ 15 मौतों का कारण डायरिया माना। हालांकि, स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों का दावा इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। रहवासियों ने राहुल गांधी से कहा कि भागीरथपुरा श्मशान बन गया है। पानी की शिकायतें तो पिछले छह महीने से की जा रही थीं, लेकिन जब 200 से 250 लोग अस्पतालों में पहुंचे, तब प्रशासन ने संज्ञान लिया।” लोगों का आरोप है कि वास्तविक मौतों की संख्या 50 से अधिक हो सकती है, लेकिन इसे जानबूझकर छिपाया गया।
श्मशान घाट के रजिस्टर गायब होने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप श्मशान घाट से जुड़े हैं। स्थानीय लोगों ने राहुल गांधी को बताया कि 28 दिसंबर को श्मशान घाट का रजिस्टर ही गायब कर दिया गया, ताकि मृतकों की सही संख्या सामने न आ सके। उनका कहना है कि अगर रजिस्टर सार्वजनिक किया जाए, तो मौतों की असली तस्वीर सामने आ सकती है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह सब प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही से बचने की कोशिश का हिस्सा है।
स्मार्ट सिटी मॉडल पर कांग्रेस का सीधा वार
राहुल गांधी के इस वीडियो के जरिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना को कटघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस का कहना है कि जिस शहर को स्मार्ट सिटी का मॉडल बताया जा रहा है, वहां लोगों को साफ पीने का पानी तक न मिलना, इस योजना की सच्चाई उजागर करता है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यह केवल इंदौर का मामला नहीं है, बल्कि देशभर में स्मार्ट सिटी के नाम पर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का उदाहरण है।
राजनीतिक टकराव तेज होने के आसार
राहुल गांधी के वीडियो के सामने आने के बाद इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के आसार हैं। कांग्रेस लगातार प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। वहीं, राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इंदौर का यह दूषित जल कांड अब सिर्फ एक स्थानीय त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि यह स्मार्ट सिटी मॉडल, प्रशासनिक जवाबदेही और जनस्वास्थ्य से जुड़े बड़े सवालों को जन्म दे रहा है,जिनके जवाब की मांग राहुल गांधी के शब्दों में, “इंदौर ही नहीं, पूरा देश” कर रहा है।