दतिया उपचुनाव: CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी खत्म, दिया एकजुटता का संदेश

नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। बैठक में दतिया उपचुनाव की रणनीति और पार्टी की स्थिति पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद भाजपा नेताओं ने संगठन की एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि पार्टी सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता संगठन के फैसले के साथ खड़े हैं।;

Update: 2026-07-12 06:48 GMT

भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में उठा विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है। पूर्व गृह मंत्री और दतिया से प्रबल दावेदार माने जा रहे नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद शुरू हुई नाराजगी शनिवार रात मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक के बाद खत्म हो गई। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। बैठक में दतिया उपचुनाव की रणनीति और पार्टी की स्थिति पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद भाजपा नेताओं ने संगठन की एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि पार्टी सर्वोपरि है और सभी कार्यकर्ता संगठन के फैसले के साथ खड़े हैं।

नरोत्तम मिश्रा बोले- दतिया सीट जिताने पर पूरा फोकस

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बैठक में दतिया विधानसभा उपचुनाव को जीतने को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों से पहले ही धैर्य और शांति बनाए रखने की अपील कर चुके हैं। मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन में 13 जुलाई को शामिल होंगे।

वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा त्यागपत्र दिए जाने की बातें सामने आई थीं, लेकिन संगठन को कोई इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं करेगी और सभी को साथ लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी।

12 घंटे हाईवे जाम के बाद बिगड़े थे हालात

टिकट नहीं मिलने के विरोध में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम से ग्वालियर-झांसी हाईवे पर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। करीब 12 घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया और वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। शनिवार सुबह प्रशासन ने जाम हटाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत चावल, भांडेर एसडीओपी पूनम चंद्र यादव सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद प्रशासन ने जिले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रतिबंधात्मक धारा 163 लागू कर दी।

कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को बनाया उम्मीदवार

दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने तीन बार विधायक रह चुके घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने जीत हासिल की थी। बाद में एक मामले में सजा होने के कारण राजेंद्र भारती को विधानसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी, जिसके चलते इस सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी है। दतिया में मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को कराई जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव और बदला राजनीतिक समीकरण

नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश भाजपा के अनुभवी नेताओं में शामिल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान सरकार में वह गृह मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें संगठन और सत्ता के बीच समन्वय बनाने वाले नेताओं में गिना जाता रहा है। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हुए राजनीतिक घटनाक्रम में भी उनकी अहम भूमिका मानी गई थी। उस समय कमल नाथ सरकार के पतन और भाजपा सरकार के गठन में उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलना भाजपा की बदली हुई चुनावी रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

स्थानीय फीडबैक और पीढ़ीगत बदलाव पर भाजपा का जोर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने इस बार स्थानीय सर्वे और जमीनी फीडबैक को अधिक महत्व दिया। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा की हार को भी पार्टी ने गंभीरता से लिया। दतिया में लंबे समय से यह चर्चा रही कि कुछ स्थानीय सहयोगियों और रिश्तेदारों की बढ़ती सक्रियता से कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा हुई थी। हालांकि, इन मुद्दों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

भाजपा के सामने चुनौती एकजुटता बनाए रखने की

नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी खत्म होने के बाद भाजपा ने राहत की सांस ली है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती समर्थकों और कार्यकर्ताओं को पूरी तरह चुनावी अभियान में सक्रिय करना है। दतिया उपचुनाव भाजपा के लिए केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकता और बदली हुई रणनीति की परीक्षा भी माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है।

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