इंदौर में दूषित पानी से मौतें, उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि राज्य के स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पताल में भी दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है
नेता प्रतिपक्ष बोले– स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों में भी मिल रहा जहरीला पानी
- जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट ने खोली पोल, 88% अस्पतालों में असुरक्षित पेयजल
- 35% संस्थानों में दूषित पानी, बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर मंडरा रहा खतरा
- सिंघार का आरोप– सरकार नल कनेक्शन दिखाने में व्यस्त, गुणवत्ता पर ध्यान नहीं
भोपाल। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि राज्य के स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पताल में भी दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने एक बयान जारी कर कहा कि सिर्फ शहरों में ही नहीं, मध्य प्रदेश में स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों में दूषित पानी पिलाया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने जल शक्ति मंत्रालय की 2024 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सार्वजनिक संस्थानों में पीने के पानी की बेहद चिंताजनक स्थिति बताई है। यह रिपोर्ट 52 जिलों के 1271 गांवों के स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों के सर्वे के आधार पर तैयार की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के केवल 58.3 प्रतिशत सार्वजनिक संस्थानों (स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल आदि) में ही नल से पानी की सुविधा है।
उन्होंने आगे कहा कि सबसे गंभीर स्थिति पानी की गुणवत्ता को लेकर है। मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की जांच में पाया गया कि स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सबसे खराब है। सिर्फ 12 प्रतिशत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ही पानी मानकों पर खरा उतरता है, बाकी 88 प्रतिशत केंद्रों पर दूषित पानी मिला।
मध्य प्रदेश के केवल 64.6 प्रतिशत सार्वजनिक संस्थानों में पीने का पानी साफ है, बाकी 35.4 प्रतिशत संस्थानों में पानी दूषित पाया गया। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ पेयजल जल की बात करें तो सिर्फ 63.6 प्रतिशत केंद्रों पर व्यवस्था पाई गई, जबकि ये बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने घरों में नल कनेक्शन की संख्या दिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया, लेकिन स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों में साफ पानी पहुंचाने में पूरी तरह नाकाम रही है, जबकि ये वही संस्थान हैं जिनका काम बच्चों और मरीजों की रक्षा करना है।