नियमित दवा लेने से कुष्ठ रोग का इलाज संभव
ग्रेटर नोएडा ! कुष्ठ रोग जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी है। त्वचा पर घाव और घाव में संवेदनहीनता कुष्ठ रोग के शुरुआती संकेत हैं।;
ग्रेटर नोएडा ! कुष्ठ रोग जीवाणुओं के कारण होने वाली एक दीर्घकालिक बीमारी है। त्वचा पर घाव और घाव में संवेदनहीनता कुष्ठ रोग के शुरुआती संकेत हैं। कुष्ठ रोग का इलाज यदि समय पर नहीं कराया जाए तो त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों में स्थाई खराबी आ सकती है। हमारे समाज में कुष्ठ रोग को लेकर कई भ्रांतियां है लेकिन असलियत यही है कि सही समय पर ईलाज कराने और बीमारी के पूरी तरह ठीक होने तक दवाई खाने से यह पूर्णतया ठीक हो सकती है।
जेपी हॉस्पिटल के त्वचा विभाग की चिकित्सक डॉ. साक्षी श्रीवास्तव के मुताबिक कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग भी कहते हैं जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री या माइकोबैक्टीरियम लेप्रोमैटोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। कोई व्यक्ति जब किसी कुष्ठ रोगी मरीज के संपर्क में आता है तब यह बीमारी उसे भी हो जाती है। कुष्ठ रोगी जो सांस छोड़ते हैं उससे कीटाणु हवा में फैल जाते हैं। यही कीटाणु जब सांसों द्वारा दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचते हैं तो यह बीमारी दूसरों को हो जाती है। कुपोषण तथा शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने पर भी कुष्ठ रोग हो सकता है लेकिन यौन क्रिया द्वारा यह बीमारी दूसरे व्यक्ति को नहीं होती। जेपी हॉस्पिटल के त्वचा विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक ने यह भी सलाह दी है कि कुष्ठ रोग में मरीज को छह महीने से 2 साल तक दवाई खानी पड़ती है। आमतौर पर लोग इसमें लापरवाही दिखाते हैं जिससे यह बीमारी मरीज, उसके परिवार, पड़ोसी या संपर्क में आने वाले लोगों को और भी अधिक बीमार बना सकती है। दरअसल अधिकांश रोगी बीमारी का पता लगने के बाद कुछ महीने तक तो दवा लेते हैं लेकिन बाद में छोड़ देते हैं। इस लापरवाही का दूसरे लोगों पर अधिक दुष्प्रभाव होता है। मरीज के कुछ दिनों तक दवाई खाने और फिर छोड़ देने के कारण दवाओं का किटाणुओं पर कोई प्रभाव नहीं होता।