नई दिल्ली/लाहौर: पाकिस्तान की कथनी और करनी के बीच अंतर एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाला पाकिस्तान, जमीनी हकीकत में भारत विरोधी गतिविधियों को खुला संरक्षण देता दिख रहा है। इस बार मामला और भी गंभीर है, क्योंकि लश्कर-ए-तैय्यबा और उससे जुड़े आतंकी नेटवर्क की एक बैठक का तीन घंटे का फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया है, जिसमें भारत के खिलाफ खुलेआम नफरत फैलाते और धमकियां देते आतंकी नेता देखे और सुने जा सकते हैं।
पीएमएमएल के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारण
सूत्रों के अनुसार, यह लाइव वीडियो पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के आधिकारिक फेसबुक पृष्ठ पर पोस्ट किया गया है। पीएमएमएल वही राजनीतिक दल है, जिसे लश्कर-ए-तैय्यबा के सरगना हाफिज सईद का समर्थक माना जाता है। वीडियो में लाहौर में सरेआम आयोजित एक बैठक दिखाई देती है, जिसमें लश्कर और उससे जुड़े अन्य आतंकी संगठनों के नेता मंच साझा करते नजर आते हैं। यह पूरा कार्यक्रम बिना किसी रोक-टोक के सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जो पाकिस्तान के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सैफुल्लाह कसूरी की खुली धमकियां
इस बैठक में पहलगाम नरसंहार के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैय्यबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी को प्रमुख वक्ता के रूप में देखा गया। तीन घंटे के लाइव वीडियो में कसूरी भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलता नजर आता है। वह दावा करता है कि भारत अगले 50 वर्षों तक पाकिस्तान को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करेगा। उसका यह बयान न केवल उकसावे भरा है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी गंभीर खतरा माना जा रहा है।
हाफिज सईद के नाम पर उकसावा
वीडियो में कसूरी यह भी कहता सुनाई देता है कि हाफिज सईद ने भारत की कथित धमकियों को खारिज कर दिया है। कसूरी के अनुसार, हाफिज सईद ने कहा, “भारत की खाली धमकियों की चिंता मत करो। हमने पहले ही भारत को एक गंभीर झटका दिया है, जिससे यह अगले 50 वर्षों तक हम पर हमला करने के बारे में नहीं सोचेगा।” इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आतंकी नेटवर्क न केवल सक्रिय है, बल्कि अपने पुराने हमलों को ‘सफलता’ के रूप में पेश कर भारत को डराने की कोशिश कर रहा है।
कश्मीर और सीमावर्ती राज्यों को लेकर साजिश
कसूरी ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और खुले तौर पर वहां ‘समर्थन’ जारी रखने की बात दोहराई। इसके साथ ही उसने यह भड़काऊ दावा भी किया कि भारत ने अमृतसर, होशियारपुर और गुरदासपुर जैसे क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति की ओर इशारा करता है, जिसके तहत वह भारत के सीमावर्ती राज्यों विशेषकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करता रहा है। इन क्षेत्रों को लेकर झूठे और भ्रामक दावे करना, वहां सांप्रदायिक तनाव और अलगाववादी भावनाओं को हवा देने की साजिश का हिस्सा माना जा रहा है।
सोशल मीडिया का खुलेआम दुरुपयोग
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा कार्यक्रम फेसबुक लाइव के जरिए प्रसारित किया गया और तीन घंटे तक ऑनलाइन रहा। सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को न केवल सार्वजनिक मंच मिल रहा है, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का भी खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं। भारत पहले ही कई बार यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है। यह ताजा घटना उन आरोपों को और मजबूत करती है।
पाकिस्तान के दावों की पोल खुली
पाकिस्तान अक्सर संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर यह दावा करता रहा है कि वह अपनी धरती से किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधियों की इजाजत नहीं देता। लेकिन लाहौर में खुलेआम हुई यह बैठक और उसका सोशल मीडिया पर प्रसारण, इन दावों को पूरी तरह झूठा साबित करता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ गंभीर होता, तो ऐसे कार्यक्रमों पर तुरंत कार्रवाई की जाती और संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया जाता। इसके उलट, यह कार्यक्रम बिना किसी हस्तक्षेप के संपन्न हुआ।
भारत की चिंता और संभावित प्रतिक्रिया
भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत में डर का माहौल बनाना, युवाओं को गुमराह करना और सीमा पार आतंकवाद को वैचारिक समर्थन देना है। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर सकता है और पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को मिल रहे संरक्षण के ठोस सबूत के तौर पर इस वीडियो का हवाला दिया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर सवाल
यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब आतंकी संगठन खुलेआम लाइव प्रसारण कर सकते हैं, तो वैश्विक निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर संदेह होना स्वाभाविक है। भारत लंबे समय से मांग करता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट और सख्त कार्रवाई हो, जिसमें डिजिटल प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
फिर उजागर हुआ दोहरा चेहरा
लाहौर में लश्कर-ए-तैय्यबा और उससे जुड़े संगठनों की इस बैठक ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया है। एक ओर वह दुनिया के सामने शांति और आतंकवाद विरोधी नीति की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उसकी धरती से भारत के खिलाफ खुलेआम नफरत और धमकियां फैलती हैं। यह मामला न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।