शाम ढलते खदान क्षेत्र में सक्रिय हो जाता है कोल माफिया
कोरबा ! पुलिस द्वारा कोयला चोरी पर अंकुश लगाने और कोयला माफियाओं को हतोत्साहित करने कार्यवाही तो की जा रही है
0 जिले से हर रोज पार हो रहा 10-12 ट्रक कोयला
0 दीपका खदान से लगे ग्राम रेकी में भी कोयला चोरी
कोरबा ! पुलिस द्वारा कोयला चोरी पर अंकुश लगाने और कोयला माफियाओं को हतोत्साहित करने कार्यवाही तो की जा रही है किन्तु इनकी जड़ें इतनी फैली हैं कि पूरा मकड़ जाल तोड़ पाना असंभव सा लगने लगा है।जिस तरह से खुलेआम कोयले की चोरी हो रही है, उससे हर महीने एसईसीएल प्रबंधन को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बावजूद इसके अपनी संपत्ति की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगा पाने में एसईसीएल नाकाम है।
एसईसीएल की खदानों के आसपास कोयला माफिया सक्रिय हैं और अवैधानिक रूप से इस काले कारोबार को चला रहेे हैं। एसईसीएल की बांकीमोंगरा, दीपका, कुसमुंडा, सुराकछार, मानिकपुर, गेवरा सहित अन्य खदानों के इर्द-गिर्द कोयला माफियाओं का इतना तगड़ा जाल है कि शाम ढलते ही इनके लोग सक्रिय हो जाते हैं। दिनभर थोड़ा-थोड़ा कोयला निर्धारित जगह पर एकत्र किया जाता है और बोरियों में भरा कोयला रात का अंधेरा छाने पर ट्रकों में लादकर शहर और जिले से बाहर किया जा रहा है। पिछले दिनों मानिकपुर के रापाखर्रा, बांकीमोंगरा के सुराकछार खदान के निकट पुलिस ने बड़ी कार्यवाही की। माना जा रहा था कि ताबड़तोड़ कार्यवाही से कोयला चोरी पर अंकुश लगेगा किन्तु ऐसा नहीं है। दीपका खदान से लगे ग्राम रेकी में तो बोरियों का कोई रोल ही नहीं बल्कि यहां तो कोयले के बड़े-बड़े बद्धे खुलेआम ट्रकों में लादकर पार कराये जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक रेकी के अमरैयापारा, रेलवे क्रासिंग के पास और खदान के ऊपर शाम के बाद रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच हर दिन 4 से 5 ट्रक लगाये जाते हैं और इन ट्रकों में कोयले के बद्धे मजदूर लगाकर लदवाने का काम शुरू होता है। कुछ घंटे के अंतराल में सभी वाहन गंतव्य के लिए रवाना भी हो जाते हैं। सीधे खदान से कोयला निकालकर हो रही चोरी से एसईसीएल के मैदानी कर्मचारी, सीआईएसएफ के जवान और सुरक्षा में लगे दूसरे स्टाफ अंजान होंगे ऐसा असंभव है। बावजूद इसके पिछले 15 दिनों से काले हीरे की चोरी का सिलसिला जारी है। इसके अलावा दूसरे खदान क्षेत्रों के भी चर्चित इलाके कोयला चोरी का केन्द्र बने हुए हैं।