पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति को उम्रकैद व अर्थदंड
कोरबा । दहेज में मोटर सायकल नहीं लाने पर पत्नी के साथ मारपीट करते हुए जिंदा जला देने वाले पति के विरूद्ध दोषसिद्ध पाये जाने पर उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया है।
कोरबा । दहेज में मोटर सायकल नहीं लाने पर पत्नी के साथ मारपीट करते हुए जिंदा जला देने वाले पति के विरूद्ध दोषसिद्ध पाये जाने पर उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया है।
करतला थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर निवासी गुरूवार सिंह की पुत्री सुमन यादव की शादी घटना दिनांक 15 जून 2014 से करीब तीन साल पहले ग्राम बेहरचुऑ निवासी अमीलाल यादव के साथ हुई थी, शादी के बाद से अमीलाल पत्नी सुमन यादव को दहेज में मोटर सायकल नहीं लाई हो कहकर मारपीट करता था। 15 जून 2014 को सुबह करीब 7:30 बजे अमीलाल ने पत्नी सुमन यादव से मारपीट कर घर में रखे मिट्टी तेल को उड़ेलकर आग लगा दिया। लपटों से घिरी सुमन यादव को कमरे से बंद कर दिया ताकि वह भाग न सके और जलकर मर जाये। थोड़ी देर बाद अमीलाल दरवाजे को खोलकर भाग गया, लेकिन सुमन में कुछ जान बाकी थी, इधर सुमन यादव के आग से जलने की सूचना पाकर पिता गुरूवार अन्य ग्रामीणों के साथ सुमन के ससुराल पहुंचा। सुमन ने इन्हें बताया कि अमीलाल ने दहेज में मोटर सायकल नहीं लाने पर जिन्दा जलाकर मार डालने के लिए जलाया है। गंभीर हालत में सुमन को पिता गुरूवार सिंह द्वारा ईलाज हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र करतला ले जाया गया, वहां से जिला अस्पताल और फिर सिम्स बिलासपुर ले जाया गया जहां ईलाज के दौरान दिनांक 20 जून 2014 को सुमन यादव की मृत्यु हो गई। सिम्स पुलिस चौकी में मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया गया। इधर मृतका के पिता गुरूवार सिंह ने घटना की लिखित शिकायत करतला थाना में दर्ज कराई जिस पर धारा 307,498(ए) भा.द.सं कायमी कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। विवेचना पूर्ण होने पर अमीलाल के विरूद्ध धारा 307, 498(ए), 304(बी), 324 के अपराध का अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। विचाराधीन प्रकरण में न्यायाधीश व्हीके एक्का ने दोषसिद्ध पाये जाने पर अमीलाल को धारा 302 के लिए आजीवन सश्रम कारावास एवं 3 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड की राशि अदायगी न करने पर एक वर्ष का सश्रम कारावास पृथक से भुगताया जाएगा। इसी तरह अभियुक्त अमीलाल को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304(बी) दहेज हत्या के आरोपित अपराध का दोषी न पाते हुये उक्त अपराध के आरोप से दोषमुक्त किया
गया है।