भारतीय विश्वविद्यालयों मेंअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब खतरे में

कोलकाता ! पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हैदराबाद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जएनयू) में बीते कुछ समय की अशांति के संदर्भ में;

Update: 2017-01-20 21:15 GMT

कोलकाता !  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हैदराबाद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जएनयू) में बीते कुछ समय की अशांति के संदर्भ में शुक्रवार को कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाना अलोकतांत्रिक है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यहां प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में कहा, "मैं समझता हूं कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को ज्ञान को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता अवश्य देनी चाहिए, भले ही वह ज्ञान स्थापित बौद्धिक और सामाजिक परंपरा से मेल ना रखता हो। हमें पूरी शिद्दत से इस स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "दुखद है कि भारतीय विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब खतरे में है।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "शैक्षणिक नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप अत्यधिक अदूरदर्शिता है।"

उन्होंने कहा, "हाल में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और जेएनयू में छात्र समुदाय की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रयास खास तौर पर चिंता का विषय है।"

सिंह ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के प्रयास न केवल सीखने के प्रतिकूल हैं, बल्कि अलोकतांत्रिक भी हैं। हमें हमारे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा और हमारे छात्रों के विचारों की अभिव्यक्ति के अधिकार को बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए, जिससे शक्तिशाली हित हमेशा सहमत नहीं भी हो सकते हैं।"

'नई उभरती राष्ट्रवादी प्रवृत्ति' का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने इन 'विनाशकारी रुझानों' के खिलाफ चेतावनी दी।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "लोकलुभावनवाद के तौर पर हम पूरे विश्व में नई राष्ट्रवादी प्रवृत्ति में वृद्धि देख रहे हैं और यह तर्क व विवेक को धता बताते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाता है। ये प्रवृत्तियां अत्यंत विनाशकारी हो सकती हैं।"

उन्होंने कहा कि हमें भारत को इन रुझानों से हर हाल में बचाना होगा और विश्वविद्यालय इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हमारे विश्वविद्यालय ऐसे भारतीय नागरिक तैयार कर सकते हैं जो कपोल कल्पित बातों से सही तथ्य को अलग करने में सक्षम हों, झूठे प्रचार का विरोध कर सकें।

सिंह ने दिसम्बर, 1947 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए भाषण का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य एक मजबूत, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत है जहां प्रत्येक नागरिकों के लिए समान जगह और प्रगति के लिए पूर्ण अवसर है।'

कांग्रेस नेता ने कहा, "असली राष्ट्रवाद वहीं पाया जाता है जहां हमारे छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने और बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जहां विरोध को प्रोत्साहित किया जाता है न कि दबाया जाता है। केवल रचनात्मक ढंग से वार्ता के जरिए असंतोष को दूर कर हम हमारे देश में एक मजबूत, अधिक रचनात्मक और आत्मनिर्भर लोकतंत्र की स्थापना कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि भारत को यह जरूर करना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने आंतरिक तनावों को अहिंसक तरीके से हल करने का आह्वान किया।

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