केरल: सबरीमाला सोना मामले की जांच जल्द पूरी करने का हाईकोर्ट का निर्देश, एसआईटी दाखिल करेगी अंतिम रिपोर्ट
सबरीमाला सोना गबन मामले की लंबे समय से चल रही जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। केरल हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल को बिना किसी और देरी के जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।;
कोच्चि। सबरीमाला सोना गबन मामले की लंबे समय से चल रही जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। केरल हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल को बिना किसी और देरी के जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
सोमवार को एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि वह जिन दो मामलों की जांच कर रही है, उनमें से एक मामले में 30 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर देगी।
मामले में सभी आरोपियों को तय समय सीमा के बाद वैधानिक जमानत मिल गई थी, क्योंकि एसआईटी उस अवधि में अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई थी। वहीं, एक आरोपी की बीमारी के कारण मौत भी हो चुकी है।
एसआईटी ने सोमवार को कोर्ट में बताया कि वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिली है और इससे कथित अपराध को अंजाम देने के तरीके को समझने में सहायता मिली है।
यह मामला सबरीमाला मंदिर में द्वारपालक (रक्षक देवता) पैनलों पर सोने की परत चढ़ाने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को तय की है।
एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े दो अलग-अलग आपराधिक मामलों की जांच कर रही है। इनमें से एक मामले में एक महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी, जबकि दूसरे मामले की जांच अभी जारी है।
कोर्ट को बताया गया कि 2025 में दर्ज उस मामले में 54 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें सोने की परत चढ़े द्वारपालक पैनलों को ले जाने के प्रयास का आरोप है।
एसआईटी ने कहा कि वैज्ञानिक जांच में जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि हुई है और इससे यह पता लगाने में मदद मिली है कि अपराध किस तरह किया गया।
इससे पहले एसआईटी ने हाईकोर्ट में एक अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें पूर्व त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड अध्यक्ष पी. एस. प्रशांत, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और सबरीमाला तंत्री (मुख्य पुजारी) को आरोपी बताया गया था।
एसआईटी की जांच के अनुसार, आरोपियों ने 2019 में कथित तौर पर एक आपराधिक साजिश रची थी, ताकि द्वारपालक पैनलों पर सोने की परत चढ़ाने के दौरान आधिकारिक रूप से बताए गए सोने से कम मात्रा के इस्तेमाल को छिपाया जा सके।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि पैनलों को हटाकर चेन्नई ले जाने की प्रक्रिया त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के नियमों का उल्लंघन थी। एसआईटी ने इसे कई वर्षों तक चलने वाली एक योजनाबद्ध प्रक्रिया बताया है, जिसमें प्रायोजक और बोर्ड के कुछ अधिकारी शामिल थे।
यह मामला काफी चर्चा में रहा है, क्योंकि यह केरल के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक सबरीमाला से जुड़ा है और इसमें मंदिर की संपत्ति तथा श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए मूल्यवान चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल उठे हैं।
एसआईटी द्वारा 30 दिनों के भीतर पहली अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की बात कहने के बाद अब यह जांच अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। कथित अनियमितताएं सामने आने के करीब सात साल बाद जांच अब अंतिम दिशा में बढ़ रही है।
अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्ष इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।