केजरीवाल व सत्येंद्र जैन ने दिया झूठा भरोसा, जेब पर पड़ेगा एक हजार करोड़ का भार!

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार चुनावी वायदों और निरन्तर आश्वासनों के बावजूद भी कल से दिल्ली वासियों के बिजली के बिल बढऩे जा रहे हैं

Update: 2017-09-01 00:05 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस की संस्था यूनाइटेड रेजीडेंट ऑफ दिल्ली के महासचिव व बिजली मामले में डीईआरसी में पेश हुए सौरभ गांधी ने कहा कि उपभोक्ताओं से अधिक पैसे वसूले जाएंगे और बिजली के दाम कम करने में डीईआरसी व दिल्ली की सरकार फेल हो गई। ऊर्जा मंत्री का विधानसभा मे किया दावा जुमला बन गया कि सरकार दाम नही बढऩे देगी। उन्होंने कहा कि 10 से 15 प्रतिशत तक दरें कम हो सकती हैं यदि कंपनियां ब्याज की दरों को कम कर दें, इससे 2600 करोड़ रूपए की बचत होगी। इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में फैसला दिया था कि पांच साल बाद इन दरों में पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार चुनावी वायदों और निरन्तर आश्वासनों के बावजूद भी कल से दिल्ली वासियों के बिजली के बिल बढऩे जा रहे हैं। तीनों बिजली कम्पनियों ने इस वर्ष 21624 करोड़ रूपए की औसतन राजस्व आवश्यकता की मांग रखी है। इससे दिल्ली वासियों पर लगभग 1250 करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार पडऩे जा रहा है। सरचार्ज में 3.7 प्रतिशत तथा फिक्स्ड चार्ज में 5 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। सब्सिडी मिलने पर कुछ मामूली फेरबदल हो सकता है।

कुल मिलाकर दिल्ली वासियों को 1000 करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार वहन करना होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री केजरीवाल और बिजली मंत्री सत्येन्द्र जैन से जवाब मांगा कि जब उन्होंने दिल्लीवासियों को आश्वासन दिया है कि किसी भी कीमत पर बिजली के दाम नहीं बढऩे दिए जाएंगे तो वे यह बताए की अब द्वारा प्रस्तावित 1250 करोड़ रूपए की वृद्धि के बोझ से कैसे बचा जाएगा।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी कहा कियदि केजरीवाल सरकार चाहती तो केवल रिटर्न ऑन इक्विटी को वर्तमान बैंक दरों के हिसाब से घटाकर बिजली दरों में 10 से 15 प्रतिशत की कटौती कर सकती थी पर सरकार ने निजी कंपनियों से सांठगांठ करना जनता को लाभ देने से बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि बीते 31 माह में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में बिजली की दरें घटाने के लिये कोई प्रयास नहीं किया और बिजली कंपनियों के खातों की जांच के नाम पर भी केवल छलावा किया गया। श्री तिवारी ने कहा कि आज सरकार ने प्रत्यक्ष रूप में तो बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं दर्शाई परन्तु परोक्ष रूप से फिक्सड सरचार्ज की दरों में किये गये बदलावों से निजी कंपनियों को 35 से 40 करोड़ रूपये का लाभ पहुंचेगा।

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