नई दिल्ली : कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में लंबे समय से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने के फार्मूले को लेकर शुरू से ही अटकलें लगती रही थीं। अब पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में गंभीर कदम बढ़ा दिए हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के साथ हुई अहम बैठकों के बाद सिद्दरमैया मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए लगभग तैयार हो गए हैं। इसके बदले उन्हें राज्यसभा भेजने और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने का प्रस्ताव दिया गया है। कांग्रेस नेतृत्व का उद्देश्य सत्ता परिवर्तन को इस तरह अंजाम देना है कि पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी या बगावत की स्थिति पैदा न हो।
राहुल गांधी की बैठक में बनी सहमति
दिल्ली में हुई बैठकों में राहुल गांधी ने पहले सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार से अलग-अलग बातचीत की, फिर दोनों नेताओं को साथ बैठाकर चर्चा की। इसी मुद्दे को लेकर 26 मई को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबी बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में सिद्दरमैया नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि सरकार अभी स्थिर है और बदलाव से गलत संदेश जा सकता है। हालांकि बाद में राहुल गांधी ने उन्हें समझाया कि पार्टी 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर नई रणनीति बनाना चाहती है। इसी दौरान सिद्दरमैया को राज्यसभा भेजने और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका देने का प्रस्ताव रखा गया। कांग्रेस नेतृत्व यह भी चाहता है कि राज्य की राजनीति में सिद्दरमैया का प्रभाव और सम्मान बना रहे। यही वजह है कि उनके करीबी नेताओं और समर्थकों को भी भविष्य की राजनीतिक संरचना में उचित प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा रहा है।
सिद्दरमैया समर्थकों की संख्या बनी चुनौती
कर्नाटक कांग्रेस में सिद्दरमैया का प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायक उनके समर्थक बताए जाते हैं। यही कारण है कि पार्टी हाईकमान किसी भी तरह का जल्दबाजी वाला फैसला लेने से बच रहा है। पार्टी नेतृत्व को इस बात का भी एहसास है कि सिद्दरमैया राज्य के प्रमुख ओबीसी चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में यदि उन्हें असंतुष्ट महसूस हुआ तो इसका असर पार्टी के सामाजिक समीकरणों पर पड़ सकता है। इसी वजह से कांग्रेस नेतृत्व पूरी प्रक्रिया को सहमति और सम्मान के साथ आगे बढ़ाना चाहता है। सूत्रों का कहना है कि हालिया बातचीत के बाद सिद्दरमैया ने संकेत दिया है कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे।
दिल्ली पहुंचे थे दोनों गुटों के विधायक
सोमवार को सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार दोनों अपने-अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे थे। इससे पहले भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई दौर की चर्चाएं हो चुकी थीं, लेकिन तब कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। इस बार माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने बदलाव की रूपरेखा लगभग तय कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्दरमैया ने गुरुवार सुबह मंत्रियों की एक ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है। राजनीतिक हलकों में इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है और अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसी दिन वे इस्तीफा दे सकते हैं।
डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री
यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो डीके शिवकुमार के कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना सबसे मजबूत मानी जा रही है। कांग्रेस सरकार बनने के समय से ही यह चर्चा थी कि मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल का समझौता हुआ था। हालांकि कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी समझौते की पुष्टि नहीं की, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा लगातार बनी रही। अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावना और मजबूत हो गई है।
सिद्दरमैया के बेटे को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व सिद्दरमैया को संतुष्ट रखने के लिए उनके बेटे को मंत्रिमंडल में जगह देने पर भी विचार कर रहा है। इसे बिहार में भाजपा द्वारा अपनाए गए राजनीतिक संतुलन वाले मॉडल की तरह देखा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि इससे सिद्दरमैया खेमे को संदेश जाएगा कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद उनका राजनीतिक महत्व कम नहीं होगा। बताया जा रहा है कि सिद्दरमैया ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा है।
प्रियंका गांधी भी बदलाव के पक्ष में
सूत्रों के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा भी कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में रही हैं। मंगलवार को हुई अहम बैठक में वह भी मौजूद थीं। कांग्रेस का आकलन है कि 2028 के विधानसभा चुनाव तक सिद्दरमैया की उम्र करीब 80 वर्ष हो जाएगी। ऐसे में पार्टी अभी से नए नेतृत्व को स्थापित करना चाहती है ताकि सत्ता विरोधी माहौल को कम किया जा सके और नए चेहरे के जरिए जनता के बीच ताजगी का संदेश दिया जा सके।
कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर नहीं की पुष्टि
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक नेतृत्व परिवर्तन की खबरों की औपचारिक पुष्टि नहीं की है। बैठक के बाद पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा कि फिलहाल केवल राज्यसभा और विधान परिषद सीटों को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की राज्यसभा और काउंसिल सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा अन्य राज्यों के साथ की जाएगी। वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को केवल अटकल बताया। फिर भी राजनीतिक संकेतों और लगातार हो रही बैठकों को देखते हुए माना जा रहा है कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लगभग तैयार हो चुकी है और आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है।