कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला-‘वीबी जी राम जी’ योजना के खिलाफ कानूनी लड़ाई
कर्नाटक कैबिनेट ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को वापस लिए जाने के मुद्दे पर चर्चा की और नई शुरू की गई विकसित भारत–जी राम जी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है
एच.के. पाटिल बोले-ग्रामीणों से रोजगार का अधिकार छीना गया
- राज्य सरकार करेगी राजनीतिक, कानूनी और जनस्तर पर विरोध
- कैबिनेट ने 33 आजीवन कैदियों की समयपूर्व रिहाई को दी मंजूरी
- 10 लाख संपत्तियों को मिलेगा ‘ए-खाता’, पंचायत चुनाव कराने का भी निर्णय
बेंगलुरु। कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को वापस लिए जाने के मुद्दे पर चर्चा की और नई शुरू की गई विकसित भारत–जी राम जी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी राज्य के पर्यटन, कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने दी।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार इस नई योजना को “जनता की अदालत” में भी ले जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि 73वें संविधान संशोधन के बाद देश में विकेंद्रीकरण को मजबूती मिली थी, लेकिन यह योजना उसी की बुनियाद पर प्रहार करती है। मनरेगा को वापस लेकर केंद्र सरकार ने ग्रामीण लोगों से रोजगार का अधिकार छीन लिया है।
पाटिल ने कहा कि मनरेगा के तहत पंचायतों के माध्यम से परिसंपत्तियों का निर्माण होता था, जबकि नई “तानाशाही कानून” जैसी योजना के तहत मजदूरों को ठेकेदारों द्वारा बनाए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्गों के काम में जबरन लगाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार को मजदूरों के कल्याण की कोई चिंता नहीं है और उनके रोजगार के अधिकार को छीन लिया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले पंचायतों को यह तय करने का अधिकार था कि गांवों में कौन-से काम किए जाएं, लेकिन अब यह अधिकार पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब केंद्र सरकार यह निर्देश देगी कि कहां और किस तरह का काम होगा। कर्नाटक सरकार इस “दमनकारी कानून” का राजनीतिक, कानूनी और जनस्तर पर विरोध करेगी।
पाटिल ने यह भी सवाल उठाया कि हालांकि 125 दिनों का रोजगार देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसे कैसे सुनिश्चित किया जाएगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने पूछा कि इसके लिए धन कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना की करीब 40 प्रतिशत लागत राज्यों को वहन करनी होगी, जिससे उन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। यदि ऐसा बोझ डालना था, तो केंद्र को राज्यों से परामर्श करना चाहिए था, जो नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह योजना 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद लाई गई है।
पाटिल ने बताया कि कैबिनेट ने पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराने का भी फैसला किया है। कई पंचायतों ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने का आग्रह किया है। इस पर एक-दो दिन में निर्णय लिया जाएगा।
कैबिनेट ने राज्य की विभिन्न केंद्रीय जेलों में बंद 33 आजीवन कारावास की सजा पाए कैदियों को अच्छे आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहा करने को भी मंजूरी दी है। इनमें से दो कैदियों की रिहाई केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति के बाद ही की जाएगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने रायचूर जिले के सिरवार तालुक के सिरवार सीमा क्षेत्र में सर्वे नंबर 2.2.39 की 10 गुंटा जमीन “कांग्रेस भवन ट्रस्ट, बेंगलुरु” को कांग्रेस भवन के निर्माण के लिए आवंटित करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट ने राज्य भर के शहरी निकाय क्षेत्रों में सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना विकसित लेआउट्स में स्थित “बी-खाता” साइट्स, भवनों, अपार्टमेंट्स और फ्लैट्स को “ए-खाता” जारी करने को भी मंजूरी दी है। पाटिल ने कहा कि इस योजना से करीब 10 लाख संपत्तियां कवर होंगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने राज्य के 31 जिलों और पांच पुलिस आयुक्तालयों में गृह विभाग के समन्वय से “अक्का पाड़ा” योजना लागू करने का भी फैसला किया है।