ज्यादातर मांगें मानीं, छात्र आंदोलन वापस लें, सीजीएल परीक्षा रद्द करना संभव नहीं: सुदिव्य कुमार
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलित छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई। सरकार ने दावा किया कि छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। उन्हें आंदोलन वापस ले लेना चाहिए। दूसरी और छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 2024 को रद्द करने और सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े रहे।;
रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलित छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई। सरकार ने दावा किया कि छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं। उन्हें आंदोलन वापस ले लेना चाहिए। दूसरी और छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 2024 को रद्द करने और सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े रहे।
मांगें पूरी न होने पर छात्रों ने आंदोलन जारी रखने और सोमवार (10 अगस्त) को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा घेराव करने का ऐलान किया है। वार्ता विफल होने के बाद चार मंत्रियों के समूह ने रविवार रात सूचना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों के रुख पर अफसोस जताया। मंत्रियों के समूह का नेतृत्व कर रहे सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों की अधिकांश प्रमुख मांगें मान ली हैं। इसके बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों से हठधर्मिता छोड़कर आंदोलन वापस लेने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने की अपील की। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को समझाएं और उन्हें आंदोलन से दूर रखें।
मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि सरकार ने 14वीं जेपीएससी पीटी और सिविल सर्विसेज की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर अपनी पूरी सहमति दे दी है। इसके अलावा, परीक्षाओं में हुए वित्तीय लेन-देन और वसूली के मामलों की सीआईडी जांच के साथ-साथ अब प्रवर्तन निदेशालय से भी जांच कराने के लिए सरकार पत्र लिखेगी। विवादित एजेंसी टीडीपीएल द्वारा ली गई अन्य सभी परीक्षाओं की भी व्यापक जांच कराई जाएगी और सबूत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग पर मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत पूरी हुई है, और इसके आधार पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, इसलिए इसे रद्द करना सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सरकार ने इस मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त जज की निगरानी में कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन छात्र इस पर भी तैयार नहीं हुए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाएगी। इसमें छात्रों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स के सुझाव शामिल किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने पोर्टल लॉन्च किया है। और इसके लिए एक नया पोर्टल भी लॉन्च होगा। सुदिव्य कुमार ने कहा कि दोषियों को सजा जरूर मिलेगी, लेकिन जब सरकार सारी जायज मांगें मान रही है, तब विधानसभा घेराव जैसे आंदोलन का रास्ता चुनना गलत है।