झारखंड के वित्त मंत्री ने राज्य की पुलिसिंग पर फिर उठाए गंभीर सवाल, डीजीपी को पत्र लिखकर कहा- हठधर्मिता छोड़िए

झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं;

Update: 2026-07-13 18:21 GMT

रांची। झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। डीजीपी को सोमवार को लिखे पत्र में उन्होंने पहले भेजे गए पत्र का जवाब नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने डीजीपी से ‘हठधर्मिता छोड़ने’ और मौजूदा सुरक्षा नियमों में बदलाव करने की सलाह भी दी है। मंत्री ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने पहले अपने सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि यह मांग उनकी निजी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उनके साथ तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए थी। इसके बावजूद उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्‍होंने इसे राज्य पुलिस की कार्यसंस्कृति के विपरीत बताया।

राधाकृष्ण किशोर ने पत्र में राज्य की पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई पीसीआर और पेट्रोलिंग वाहनों में केवल एक चालक और एक पुलिस पदाधिकारी की तैनाती की जा रही है। ऐसे में जब सुरक्षा देने वाले पुलिसकर्मी ही असुरक्षित हैं, तो वे आम लोगों की सुरक्षा कैसे करेंगे?

उन्होंने कहा कि पर्याप्त बजट होने के बावजूद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होना राज्य की सुरक्षा नीति की विफलता को दर्शाता है। मंत्री ने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर कई रसूखदार लोगों, भू-माफियाओं, अवैध खनन से जुड़े कारोबारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को पुलिस अंगरक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह पुलिस बल और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग है।

मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी से वर्तमान और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की भी मांग की।

पत्र के अंत में मंत्री ने लिखा, ‘डीजीपी मैडम, अब तो हठधर्मिता छोड़िए और सुरक्षा के पुराने नियमों को बदलिए। अपराध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आम नागरिकों, सुरक्षा जोखिम वाले लोगों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए नए सुरक्षा मानक तय कीजिए।’ यह दूसरी बार है जब मंत्री ने सार्वजनिक रूप से डीजीपी की कार्यप्रणाली और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

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