भाकपा का हमला – बजट दिशाहीन और जनविरोधी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता नारायण के. ने केंद्रीय बजट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे दिशाहीन, कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला और आम जनता की ज़मीनी सच्चाइयों से कटा हुआ बताया

Update: 2026-02-01 17:56 GMT

किसानों और मजदूरों की अनदेखी पर नारायण के का तीखा बयान

  • शिक्षा-स्वास्थ्य में कम निवेश, निजीकरण को बढ़ावा का आरोप
  • कर्ज़ और रक्षा पर भारी खर्च, सामाजिक क्षेत्र उपेक्षित
  • कॉरपोरेटपरस्त बजट पर भाकपा ने सरकार को घेरा

हैदराबाद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वरिष्ठ नेता नारायण के. ने रविवार को केंद्रीय बजट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे दिशाहीन, कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला और आम जनता की ज़मीनी सच्चाइयों से कटा हुआ बताया।

एक बयान में श्री नारायण के ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने "मधुर भाषण से लोगों को सम्मोहित करने" की कोशिश की, जबकि बजट में किसानों, ग्रामीण मज़दूरों, युवाओं और बेरोज़गारों की कठिनाइयों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है। उन्होंने कहा कि भले ही बजट का आकार 50.65 लाख करोड़ रुपये बताया गया हो, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में दिखाया गया दो लाख करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा लगभग पाँच प्रतिशत मुद्रास्फीति के बाद प्रभावहीन हो जाता है।

उन्होंने कहा कि बजट का 12.76 प्रतिशत हिस्सा कर्ज़ और उसके ब्याज के भुगतान में तथा 6.81 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है, जबकि सामाजिक क्षेत्रों के लिए आवंटन बेहद कम है। मनरेगा के लिए आवंटन 86,000 करोड़ रुपये पर यथावत रहने को उन्होंने ग्रामीण संकट से निपटने के लिए पूरी तरह अपर्याप्त बताया। वहीं शिक्षा को कुल बजट का केवल 2.5 प्रतिशत और स्वास्थ्य को लगभग दो प्रतिशत ही आवंटित किया गया है, जो लंबे समय से की जा रही अधिक निवेश की मांग के विपरीत है।

श्री नारायण के ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपर्याप्त फंडिंग इन क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष रूप से निजीकरण की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा कि बजट में सामाजिक सरोकारों का अभाव है और यह कृषि पर निर्भर आबादी की आवश्यकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करता।

उन्होंने लापरवाह उधारी की आलोचना करते हुए कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज़ चुकाने में जाना दीर्घकालिक दृष्टि के अभाव को दर्शाता है। हवाई अड्डा ढांचे पर भारी खर्च पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक धन का उपयोग निजी एयरलाइनों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जबकि यात्रियों को अब भी ऊंचे किराए चुकाने पड़ रहे हैं।

बजट को "बेकार और जनविरोधी" करार देते हुए श्री नारायण के ने कहा कि इसमें देश के भविष्य के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे दस्तावेज़ का बचाव करने के लिए वित्त मंत्री के प्रति उन्हें सहानुभूति है।

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