गांदरबल मुठभेड़ पर उठे सवाल: परिवार ने बताया ‘फर्जी’, सीएम उमर अब्दुल्ला ने मांगी निष्पक्ष जांच

मृतक के भाई एजाज अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका परिवार पूरी तरह निर्दोष है और आतंकवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

Update: 2026-04-03 06:37 GMT
श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में हाल ही में हुई एक मुठभेड़ अब विवादों के घेरे में आ गई है। सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए एक कथित आतंकी को लेकर उसके परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे घटनाक्रम को “फर्जी मुठभेड़” बताया है। मामले ने तूल तब पकड़ा जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इन आरोपों को गंभीर बताते हुए समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, गांदरबल जिले के अरहामा क्षेत्र के ऊपरी जंगलों में मंगलवार रात को आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रातभर चली मुठभेड़ के बाद बुधवार सुबह सेना ने घोषणा की कि एक आतंकी को मार गिराया गया है। घटनास्थल से एक असॉल्ट राइफल बरामद होने की भी बात कही गई। हालांकि, शुरुआती चरण में सेना या पुलिस की ओर से मारे गए व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी।

मृतक की पहचान और बढ़ता विवाद

बाद में स्थानीय स्तर पर मृतक की पहचान गांदरबल के चूंट वालीवाड़ इलाके के निवासी अरशद मुगल के रूप में हुई। बताया गया कि उसे बुधवार दोपहर बाद दफना दिया गया। जैसे ही यह खबर उसके गांव और आसपास के इलाकों में फैली, लोगों में आक्रोश फैल गया। परिवार और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में अरशद आतंकी गतिविधियों में शामिल था।

परिवार का दावा: “हमारा आतंकवाद से कोई संबंध नहीं”

मृतक के भाई एजाज अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका परिवार पूरी तरह निर्दोष है और आतंकवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि अरशद ने हाल ही में एमए की पढ़ाई पूरी की थी और वह स्थानीय लोगों के ऑनलाइन फॉर्म भरने का काम करता था। इसी से वह अपनी आजीविका चला रहा था। एजाज के अनुसार, मंगलवार सुबह अरशद घर से निकला था लेकिन वापस नहीं लौटा। अगले दिन उन्हें पुलिस थाने से फोन आया, जिसमें एक मारे गए आतंकी की पहचान करने के लिए बुलाया गया।

एजाज ने आरोप लगाया, जब मैंने शव देखा, तो वह मेरा भाई अरशद ही था, लेकिन उसके शरीर पर वे कपड़े नहीं थे जो वह घर से पहनकर गया था। उसे दूसरे कपड़े पहनाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि अरशद किसी भी प्रकार की आतंकी या अलगाववादी गतिविधियों में शामिल नहीं था और उसे “फर्जी मुठभेड़” में मारा गया है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मृतक के परिजनों के आरोपों को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “ये सामान्य आरोप नहीं हैं। अगर जांच में देरी होती है या इसे टाला जाता है, तो इससे संबंधित संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान होगा।” सीएम ने स्पष्ट किया कि इस मामले की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का विश्वास बना रहे।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी इस मुठभेड़ पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

पुलिस का पक्ष: जांच जारी

गांदरबल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) खलील अहमद पोसवाल ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है और पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सेना के अनुसार ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया था, लेकिन अब सामने आए आरोपों के मद्देनजर मृतक की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम की जांच की जा रही है। एसएसपी ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतक का एक भाई पाकिस्तान में है, हालांकि इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

सेना की प्रतिक्रिया

हालांकि रक्षा मंत्रालय या सेना की ओर से इस मामले पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन एक सैन्य अधिकारी ने अनौपचारिक तौर पर कहा कि मारे गए व्यक्ति के परिजन इस तरह के आरोप लगा सकते हैं। यह बयान भी विवाद का कारण बन सकता है, क्योंकि परिवार और स्थानीय लोग पहले से ही नाराज हैं।

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