जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल संशोधन बिल लोकसभा से पास
जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक के न्यास के पदेन सदस्य के रूप में ‘कांग्रेस अध्यक्ष’ का नाम हटाने के प्रावधान वाला विधेयक विपक्ष के विरोध और बहिर्गमन के बीच आज लोकसभा में पारित;
नयी दिल्ली। जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक के न्यास के पदेन सदस्य के रूप में ‘कांग्रेस अध्यक्ष’ का नाम हटाने के प्रावधान वाला विधेयक विपक्ष के विरोध और बहिर्गमन के बीच आज लोकसभा में पारित हो गया।
जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम में यह व्यवस्था है कि कांग्रेस पार्टी का नेता न्यास का पदेन सदस्य होगा। आज पारित जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2019 अधिनियम के इस उपखंड को समाप्त कर देगा। साथ ही विधेयक में ‘लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष’ के स्थान पर ‘लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता’ को न्यास का पदेन सदस्य बनाने का भी प्रावधान है। अभी न्यास के सदस्यों को पाँच साल से पहले नहीं हटाया जा सकता है। विधेयक के प्रावधान के अनुसार, सरकार किसी भी सदस्य को उसका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा सकती है।
संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने विधेयक पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुये विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि सरकार इतिहास बदलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा “हम किसी का इतिहास बदलने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हम इतिहास रचने की कोशिश कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि संस्कृति और इतिहास का पुनर्लेखन न हो। पर कम से कम उसका पुनर्निरीक्षण तो हो।”
पटेल ने कहा कि इन संशोधनों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी पार्टी को आपत्ति होनी चाहिये। हमने यह नहीं कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की जगह भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष अब न्यासी होगा। इस विधेयक के जरिये जलियाँवाला बाग स्मारक को राजनीति से दूर कर राष्ट्रीय स्मारक बनाया जा रहा है।
विधेयक को विचार के लिए मत विभाजन के जरिये रखा गया जिसमें समर्थन में 214 और विरोध में 30 मत पड़े। कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने भी विरोध में मतदान किया। आरएसपी के एन.के.प्रेमचंद्रन तथा तृणमूल के सौगत रॉय के एक-एक संशोधनों मत विभाजन में अस्वीकृत हो गये। बाद में विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।