वॉशिंगटन/कीव: Ukraine Russia वॉर: रूस के साथ लंबे समय से जारी युद्ध के बीच यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अब तक अमेरिकी हथियारों, सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारी ने यूक्रेनी सेना को रूसी हमलों का मुकाबला करने में अहम मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया रुख ने कीव की रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सप्ताह के भीतर सामने आए चार घटनाक्रमों ने यूक्रेन पर युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते का दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। इनमें रूसी ईंधन पर प्रतिबंधों में राहत, राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की पहल और स्टारलिंक सेवाओं को लेकर विवाद शामिल हैं। हालांकि, इन घटनाओं के वास्तविक सैन्य प्रभाव का आकलन स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
रूसी ईंधन पर राहत से मॉस्को को आर्थिक फायदा?
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच संबंध बताते हुए रूसी ईंधन की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने की बात कही। उनका तर्क है कि इससे ऊर्जा बाजार में दबाव कम करने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यह फैसला यूक्रेन के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि रूस तेल और गैस के निर्यात से बड़ी कमाई करता है। ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला राजस्व रूसी अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और युद्ध से जुड़े खर्च उठाने की उसकी क्षमता को प्रभावित करता है। यदि प्रतिबंधों में राहत से रूसी निर्यात और आय बढ़ती है, तो इसका अप्रत्यक्ष फायदा मॉस्को को मिल सकता है।
जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप ने उठाए सवाल
ट्रंप ने जेलेंस्की से नया राष्ट्रपति चुनने की बात कहकर राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेनी नेतृत्व के पास युद्ध समाप्त करने के कई अवसर थे, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया गया। ट्रंप की इस टिप्पणी से संकेत मिला कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध को समाप्त करने के लिए कीव पर समझौते का दबाव बढ़ाना चाहता है। यूक्रेन के लिए चुनौती यह है कि रूस के साथ किसी समझौते में उसकी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की गारंटी जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अमेरिकी दबाव और यूक्रेन की शर्तों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की पहल
ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए ट्रंप की ओर से युद्धविराम की घोषणा किए जाने के बाद भी सवाल उठे। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें इस पहल की पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार है, बशर्ते रूस भी यूक्रेनी ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना बंद करे। बिजली संयंत्रों, तेल रिफाइनरियों और ईंधन आपूर्ति से जुड़े ठिकानों पर हमलों का असर नागरिक जीवन के साथ-साथ दोनों देशों की सैन्य क्षमता पर भी पड़ता है। इसलिए किसी भी युद्धविराम की सफलता दोनों पक्षों की भागीदारी और उसकी निगरानी की व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
स्टारलिंक को लेकर विवाद
यूक्रेन की सेना ड्रोन संचालन, निगरानी और संचार के लिए सैटेलाइट इंटरनेट सहित कई तकनीकों पर निर्भर करती है। स्टारलिंक सेवा में गति या पहुंच संबंधी प्रतिबंधों की खबरों ने यूक्रेनी सैन्य अभियानों पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ाई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ड्रोन की गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे से घटकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई और निर्धारित सीमा पार करने पर उसका कनेक्शन कट सकता था। ऐसे किसी प्रतिबंध का वास्तविक प्रभाव इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों और तकनीकी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
पुतिन को कैसे मिल सकता है फायदा?
ट्रंप के रुख से रूस को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलने की संभावना है। रूसी ऊर्जा निर्यात को राहत, यूक्रेन पर समझौते का दबाव और अमेरिकी सैन्य सहायता को लेकर अनिश्चितता मॉस्को की स्थिति मजबूत कर सकती है। दूसरी ओर, यूरोपीय देशों की भूमिका और यूक्रेन की अपनी सैन्य क्षमता इस समीकरण को प्रभावित करेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाशिंगटन की नीति में बदलाव स्थायी होगा या यह युद्ध समाप्त कराने की बातचीत का हिस्सा है।
यूक्रेन के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
अमेरिका की सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी कम होने से यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। पहली चुनौती खुफिया जानकारी की होगी। रूसी मिसाइलों और सैन्य गतिविधियों के बारे में समय रहते सूचना मिलना यूक्रेन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी चुनौती वायु रक्षा की होगी। पैट्रियट जैसी प्रणालियों के लिए मिसाइलों और अन्य कलपुर्जों की आपूर्ति बाधित होने पर महत्वपूर्ण शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा कठिन हो सकती है। तीसरी चुनौती ड्रोन और संचार की होगी। निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सैन्य अभियानों के समन्वय में तकनीकी सहायता की कमी बाधा पैदा कर सकती है। हालांकि, अमेरिकी मदद में कटौती का अर्थ यह नहीं कि यूक्रेन तुरंत युद्ध हार जाएगा। यूक्रेन घरेलू हथियार उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और यूरोपीय देशों की सहायता भी उसके लिए महत्वपूर्ण है।