पत्नी के चक्कर में गई मंत्री की कुर्सी, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 15 दिन में ही कैबिनेट से हटाया

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह निर्णय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सिफारिश पर लिया गया।

Update: 2026-04-10 10:01 GMT
काठमांडू। नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और सख्त प्रशासनिक शैली के लिए चर्चित युवा प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ ने पद संभालते ही कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री बनने के महज 15 दिनों के भीतर ही उन्होंने अपनी ही सरकार के एक मंत्री को पद से हटा दिया, जबकि एक अन्य मंत्री को लापरवाही के लिए चेतावनी जारी की गई है। इस कार्रवाई को सुशासन और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

मंत्री को गंवानी पड़ी कुर्सी

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को उनके पद से हटा दिया गया है। यह निर्णय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सिफारिश पर लिया गया। दीप कुमार साह पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की। बताया गया कि उनकी पत्नी का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद उन्हें स्वास्थ्य बीमा बोर्ड का सदस्य दोबारा नियुक्त कराने में मंत्री साह की भूमिका रही।

RSP नेतृत्व की सिफारिश पर हुई कार्रवाई

RSP के प्रमुख रवि लामिछाने ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह को मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। पार्टी के केंद्रीय अनुशासन आयोग ने भी जांच के बाद साह को पद से हटाने की सिफारिश की, जिसे प्रधानमंत्री ने तुरंत स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह सिफारिश बुधवार को सौंपी गई थी और इसके आधार पर कार्रवाई की गई। मंत्री को हटाने के बाद फिलहाल श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी खुद प्रधानमंत्री शाह ने अपने पास रखी है।

स्वास्थ्य मंत्री को भी मिली चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम में स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्री निशा मेहता की भूमिका पर भी सवाल उठे। आरोप था कि उन्होंने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की। रवि लामिछाने ने प्रधानमंत्री से सिफारिश की थी कि मंत्री मेहता को चेतावनी दी जाए। इस पर कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने उन्हें आधिकारिक चेतावनी जारी की है। यह कदम साफ संकेत देता है कि सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

‘बालेन’ की सख्त छवि और तेज फैसले

बालेंद्र शाह, जिन्हें आमतौर पर ‘बालेन’ के नाम से जाना जाता है, नेपाल की राजनीति में एक नए और अलग तरह के नेता के रूप में उभरे हैं। रैपर से राजनेता बने बालेन शाह अपनी स्पष्टवादिता और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद इतनी जल्दी मंत्री को हटाने का फैसला उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। इससे यह संदेश भी गया है कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार, पक्षपात या पद के दुरुपयोग के लिए कोई जगह नहीं है।

Gen Z आंदोलन के बाद सत्ता में आई RSP

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सरकार का गठन हाल ही में हुए चुनावों के बाद हुआ है। ये चुनाव पिछले साल ‘Gen Z’ के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद कराए गए थे, जिनमें पारंपरिक राजनीतिक दलों के खिलाफ जनता में भारी असंतोष देखने को मिला था। इन चुनावों में RSP ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई स्थापित पार्टियों को पीछे छोड़ दिया और सत्ता पर काबिज हुई। युवा मतदाताओं और बदलाव की मांग ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई।

सुशासन का संदेश 

प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस फैसले को जहां एक ओर सख्त प्रशासन और पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है, वहीं कुछ विश्लेषक इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं, जिससे सरकार अपनी मजबूत और निष्पक्ष छवि बनाना चाहती है। हालांकि, इतना साफ है कि बालेन शाह ने शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार में अनुशासन और जवाबदेही सर्वोपरि रहेगी। यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत देता है, जहां युवा नेतृत्व तेज और सख्त फैसलों के जरिए व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहा है।
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