रोम: इटली में शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की खराब हालत और सरकारी खर्च को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने देश के प्रमुख शहरों में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमले करने को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, शिक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे इटली में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
प्रदर्शन का अधिकार, हिंसा की अनुमति नहीं
प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और हिंसा फैलाने वाले लोगों के बीच स्पष्ट अंतर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचारों को सामने रखने और सरकार की नीतियों का विरोध करने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस स्वतंत्रता का इस्तेमाल शहरों में अराजकता फैलाने या कानून-व्यवस्था को चुनौती देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। मेलोनी ने हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों को गुंडा करार देते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदर्शनों का फायदा उठाकर पुलिस पर हमला करते हैं और शहरों को बंधक बनाने जैसी स्थिति पैदा कर देते हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “प्रदर्शन करना अधिकार है। हमारे शहरों को आग के हवाले करना नहीं।” प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले हजारों लोगों के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया। इनमें इटली के प्रमुख श्रमिक संगठन सीजीआईएल के आह्वान पर आयोजित आंदोलन में शामिल लोग और वामपंथी नेता भी थे। उन्होंने कहा कि किसी विचार के समर्थन या विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद है।
मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या में हिंसा की घटनाएं
मेलोनी ने अपने बयान में कई शहरों में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, मिलान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंके गए, जिससे कई अधिकारी घायल हुए। हालात बिगड़ने के कारण जुलूस को रोकना पड़ा। ट्यूरिन में भी प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति पैदा हुई। यहां पत्थर फेंकने और खिड़कियां तोड़ने के लिए हथौड़ों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को रोकने की कार्रवाई की गई। वहीं, बोलोन्या में उपद्रव की आशंका और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते एहतियातन रेलवे स्टेशन बंद करना पड़ा। मेलोनी ने विपक्षी दलों से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हिंसा की निंदा की जानी चाहिए। सरकार की नीतियों का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले करने को राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
शिक्षा व्यवस्था से नाराज छात्र
इटली में छात्र आंदोलन का प्रमुख कारण शिक्षा क्षेत्र में सरकारी निवेश की कमी, स्कूलों की जर्जर इमारतें और पढ़ाई से जुड़े बढ़ते खर्च हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और किफायती आवास की मांग को लेकर रोम और ट्यूरिन सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर छात्रों ने स्कूल परिसरों पर कब्जा कर लिया। 16 अक्टूबर को रोम में हजारों छात्र शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री ग्यूसेपे वाल्दितारा के फैसलों के खिलाफ विरोध जताया। इससे पहले हुए कुछ प्रदर्शनों में पुलिस के साथ झड़प और पथराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन घटनाओं ने छात्र आंदोलन को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर छात्र शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा रोकने पर जोर दे रही है।
30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल की तैयारी
आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए छात्र संगठन अब कर्मचारियों और श्रमिक समूहों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाना और सरकार पर अपनी मांगें मानने के लिए दबाव बढ़ाना है। छात्रों की प्रमुख मांगों में शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाना, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत, शैक्षणिक सुविधाओं में सुधार और विद्यार्थियों के लिए सस्ते हॉस्टल उपलब्ध कराना शामिल है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति के कारण किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। आगामी हड़ताल से पहले सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक ओर छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों पर जवाब देना होगा, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर नियंत्रण भी रखना होगा। 30 अक्टूबर का आंदोलन यह संकेत दे सकता है कि छात्र संगठनों और सरकार के बीच टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।