होर्मुज को खुलवाने के लिए ट्रंप बेचैन, परमाणु मुद्दा भी टालने को तैयार!

अराघची ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। उनके मुताबिक, जून में हुए अंतरिम समझौते का अमेरिका ने उल्लंघन किया था। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।;

Update: 2026-08-10 07:47 GMT

वॉशिंगटन/तेहरान : होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया है कि केवल ईरान और ओमान के बीच समझौता होने से जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खुलेगा। ईरान की शर्तें पूरी होने के बाद ही यहां समुद्री यातायात सामान्य करने पर सहमति बन सकती है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ होर्मुज को लेकर प्रस्तावित समझौता अंतिम चरण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान की अन्य मांगों पर अमेरिका सहमत नहीं होता, तब तक जलडमरूमध्य को जहाजों की सामान्य आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा।

अमेरिका के फैसले पर टिकी नजर

मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान के बीच एक अस्थायी समुद्री मार्ग तैयार किया जा सकता है। इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही तब शुरू होगी, जब अमेरिका ईरान की प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लेगा। इस घटनाक्रम ने अमेरिका को बातचीत के केंद्र में ला दिया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज से समुद्री यातायात बहाल करने को प्राथमिकता देते हुए प्रस्तावित परमाणु समझौते को फिलहाल आगे टाल सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन होर्मुज को खोलने को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश करने की तैयारी कर सकता है। ऐसे में परमाणु मुद्दे पर व्यापक समझौते को बाद के चरण के लिए छोड़ा जा सकता है।

ईरान-अमेरिका के बीच सीधी बातचीत नहीं

अराघची ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। उनके मुताबिक, जून में हुए अंतरिम समझौते का अमेरिका ने उल्लंघन किया था। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ट्रंप पिछले कुछ सप्ताह से ऐसे संभावित समाधान की जमीन तैयार कर रहे हैं, जिसमें औपचारिक परमाणु समझौते के बिना भी अमेरिका कुछ कदम पीछे हट सकता है।

प्रतिबंध हटाने समेत ईरान की कई मांगें

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोल्घादर ने शनिवार को कहा था कि अमेरिका को पहले ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने होंगे और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करनी होगी। इसके अलावा ईरान क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करने, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करने और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग भी कर रहा है। तेहरान ने लेबनान, फलस्तीन, यमन और इराक में अपने सहयोगियों के खिलाफ हमले और ईरान को दी जा रही सैन्य धमकियां रोकने की शर्त भी रखी है। इन व्यापक मांगों के कारण दोनों देशों के बीच ऐसा समझौता करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, जिसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिल सके।

ट्रंप बोले- ईरान पर ज्यादा ध्यान नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन ईरान में महंगाई और पैसे की कमी के कारण बढ़ रहे आर्थिक दबाव पर नजर रख रहा है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ईरान से केवल उसके आग्रह पर बातचीत कर रहा है।

सऊदी अरब में हाउती का बड़ा हमला

होर्मुज को लेकर कूटनीतिक गतिविधियों के बीच ईरान समर्थित यमन के हाउती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में भी हमला किया। रविवार को लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा को निशाना बनाया गया। एपी के मुताबिक, हमले में चार सैनिकों और तीन नागरिकों की मौत हुई, जबकि 15 लोग घायल हुए। सऊदी अरब की जाजान रिफाइनरी पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, हमले में बंदरगाह की इमारतों और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा। रिफाइनरी में लगी आग पर बाद में काबू पा लिया गया। हाउती प्रवक्ता याहया सारी ने दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र की रिफाइनरी को निशाना बनाने की पुष्टि की। इस रिफाइनरी में रोजाना करीब चार लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन किया जाता है।

मक्का रक्षा समझौते के बाद हमला

हाउती के ये हमले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के दो दिन बाद हुए हैं। हालांकि, अगर क्षेत्र में हमले और बढ़ते हैं तो इस समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्किए सऊदी अरब की मदद के लिए किस तरह प्रतिक्रिया देंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। होर्मुज संकट और सऊदी पर हुए हमले ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य हो पाती है।

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