मिशन आर्टेमिस-2 में भारतीय मूल के अमित क्षत्रिय ने निभाई अहम भूमिका, जानें उनके बारे में
क्षत्रिय ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से गणित में बैचलर आफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। वह पहले एक साफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर थे और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस ) के फ्लाइट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है, जहां उन्होंने वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया।
ह्यूस्टन : Artemis II Mission: बचपन में राकेट प्रक्षेपण देखकर प्रेरित होने वाले और बाद में नासा में अभियानों की कमान संभालने वाले भारतीय मूल के अमित क्षत्रिय ने आर्टेमिस-2 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आर्टेमिस-2 के चार सदस्यीय दल ने शुक्रवार को प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की।
वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत
क्षत्रिय वर्तमान में नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर हैं और एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। 2021 में क्षत्रिय को नासा मुख्यालय में एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट मिशन डायरेक्टोरेट के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने आर्टेमिस-1 मिशन के तहत चंद्रमा के लिए मानवयुक्त यान ले जाने और उसकी वापसी में अहम भूमिका निभाई।
वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया
क्षत्रिय ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से गणित में बैचलर आफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। वह पहले एक साफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर थे और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस ) के फ्लाइट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया है, जहां उन्होंने वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया।
आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल से सम्मानित
वह नासा में सर्वोच्च रैंकिंग वाले सिविल सेवकों में से हैं और उन्हें उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता के लिए नासा द्वारा प्रतिष्ठित 'आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल' से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें 'सिल्वर स्नूपी' अवार्ड भी मिल चुका है जो अंतरिक्ष यात्री उड़ान सुरक्षा में योगदान के लिए देते हैं।
आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री वापस लौटे
आर्टेमिस-2 के चार सदस्यीय दल ने शुक्रवार को पृथ्वी के वायुमंडल को पार करते हुए प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की। नासा का ओरियन कैप्सूल दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में उतरा। मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 252,756 मील दूर ले जाया गया था, जो अंतरिक्ष में अब तक की सबसे दूर यात्रा थी। आर्टेमिस-2 उड़ान 2028 से शुरू होने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर वापस ले जाने के उद्देश्य से आर्टेमिस मिशनों की शृंखला में पहली मानवयुक्त परीक्षण उड़ान थी।
रेडियो पर संदेश भेजा
मिशन कमांडर रीड वाइजमैन ने पानी में उतरने के तुरंत बाद रेडियो पर संदेश भेजा कि चारों क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। क्रू सदस्यों में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के अलावा कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल थे। अंतरिक्ष यान के चालक दल की अधिकतम दूरी 252,756 मील थी, जिसने अपोलो 13 के चालक दल द्वारा 1970 में बनाए गए 248,000 मील के रिकार्ड को तोड़ दिया। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर अमित क्षत्रिय ने कहा, "यह एक अद्भुत मशीन का अद्भुत परीक्षण है।" दरअसल, नासा चीन से पहले चंद्रमा पर मानवयुक्त लैंडिंग करने का प्रयास कर रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 के आसपास अपने दल को वहां भेजना है।