कीव पहुंचे जयशंकर, बोले- यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में भारत मदद के लिए तैयार, बातचीत से निकलेगा समाधान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का तीन दिवसीय दौरा 3 से 5 सितंबर तक है। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा कर रहे हैं। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करना है।;

Update: 2026-09-03 14:10 GMT

कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने एक बार फिर अपने पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात के दौरान कहा कि युद्ध का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत दोनों पक्षों की सहमति होने पर शांति प्रयासों में किसी भी तरह की मदद करने के लिए तैयार है। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। भारत लगातार दोनों पक्षों से बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने की अपील करता रहा है। कीव में जयशंकर ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि नई दिल्ली की प्राथमिकता युद्ध को खत्म कराने और शांति की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा देने की है।

रूस-यूक्रेन को बातचीत की मेज पर आने का संदेश

यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि मौजूदा संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। उनके मुताबिक, स्थायी और स्वीकार्य समाधान के लिए संबंधित पक्षों को बातचीत, कूटनीति और समझौते का रास्ता अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि भारत किसी भी तरीके से शांति स्थापित करने में योगदान दे सकता है तो वह इसके लिए तैयार है। जयशंकर के इस बयान को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि रूस और यूक्रेन दोनों की सहमति होने पर भारत शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने से पीछे नहीं हटेगा।

आर्थिक दबाव से नहीं खत्म होगा युद्ध

रूसी तेल की खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि संघर्ष को केवल आर्थिक दबाव के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह युद्ध इस वजह से समाप्त नहीं होगा कि कोई देश रूस से तेल, खनिज, धातु, खाद या अन्य वस्तुओं की खरीद करता है या नहीं। विदेश मंत्री ने जोर दिया कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। भारत इसी दिशा में प्रयासों को बढ़ावा देता रहेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है।

व्यापार और तकनीक पर भी हुई बातचीत

जयशंकर और सिबिहा के बीच भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, उर्वरक, मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं सहित कई क्षेत्रों में व्यापार होता है। जयशंकर ने कहा कि युद्ध और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों के कारण पिछले चार वर्षों में व्यापार प्रभावित हुआ है, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में नई संभावनाएं भी उभरी हैं। डिजिटल तकनीक, नवाचार, स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि AI स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रहा है। ऐसे में भारत और यूक्रेन भविष्य की साझेदारी के लिए इन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर काम कर सकते हैं।

शिक्षा और भारतीय छात्रों का मुद्दा भी उठा

बैठक में शिक्षा को भी भारत-यूक्रेन सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। जयशंकर ने युद्ध के दौरान भारतीय छात्रों की मदद और देखभाल करने वाले यूक्रेनी अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय छात्र यूक्रेन में शिक्षा हासिल करते रहे हैं और शिक्षा दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा है।

काला सागर में जहाजों की सुरक्षा पर चिंता

दोनों विदेश मंत्रियों ने काला सागर की सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का मुद्दा भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि अतीत में ऐसी घटनाओं से भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं।

5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड में रहेंगे जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का तीन दिवसीय दौरा 3 से 5 सितंबर तक है। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा कर रहे हैं। दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद जयशंकर का कीव दौरा भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली एक ओर रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को बनाए रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

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