हूती विद्रोहियों के पास कितनी ताकत? मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी अरब से इजराइल तक खतरा, लाल सागर पर भी संकट

पारंपरिक वायुसेना नहीं होने के बावजूद हूती लंबी दूरी के हथियारों के जरिए सऊदी अरब, इजराइल और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। उनके हथियारों की रेंज, कम लागत वाले ड्रोन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मौजूद ठिकाने विरोधी सेनाओं के लिए मुश्किलें बढ़ाते हैं।;

Update: 2026-10-11 10:13 GMT

सना। यमन के हूती विद्रोहियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पारंपरिक वायुसेना नहीं होने के बावजूद हूती लंबी दूरी के हथियारों के जरिए सऊदी अरब, इजराइल और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। उनके हथियारों की रेंज, कम लागत वाले ड्रोन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मौजूद ठिकाने विरोधी सेनाओं के लिए मुश्किलें बढ़ाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हूतियों के पास कौन-कौन से हथियार हैं और अमेरिका तथा सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई के बावजूद उन्हें रोकना इतना मुश्किल क्यों है?

1. हूतियों के पास कौन-कौन सी मिसाइलें हैं?

हूतियों के हथियारों में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंचाई तक जाकर लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें उड़ान के दौरान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर विमान की तरह आगे बढ़ सकती हैं।

हूतियों के प्रमुख हथियारों में तूफान, बुरकान, हातिम और फिलिस्तीन-2 जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल बताई जाती हैं। तूफान की अनुमानित मारक दूरी 1,350 से 2,000 किलोमीटर है। फिलिस्तीन-2 को हूती हाइपरसोनिक बताते हैं, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमताओं की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। बुरकान के अलग-अलग संस्करणों की दूरी लगभग 800 से 1,200 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि हातिम की अनुमानित रेंज करीब 1,450 किलोमीटर है। इसके अलावा कुद्स-4 क्रूज मिसाइल और असीफ जैसी जहाज रोधी मिसाइलें भी चर्चा में रही हैं। अल-मंदब मिसाइल का इस्तेमाल समुद्री लक्ष्यों के विरुद्ध किया जा सकता है।

2. लंबी दूरी के ड्रोन क्यों हैं बड़ी चुनौती?

मिसाइलों के अलावा हूतियों के पास विस्फोटक ड्रोन का नेटवर्क भी है। कासेफ-1 और कासेफ-2K जैसे ड्रोन की अनुमानित दूरी करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है। समाद-3 की रेंज 1,200 से 1,800 किलोमीटर तक होने का दावा किया जाता है, जबकि कुछ अन्य मॉडलों की अधिकतम दूरी 2,500 किलोमीटर बताई गई है। इनमें से कुछ ड्रोन लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करते हैं, जबकि अन्य प्रकार के ड्रोन अलग तरीके से हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन को रोकने के लिए महंगी वायु रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे जाने पर रडार और रक्षा प्रणालियों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

3. ईरान से हथियार मिलने के आरोप

हूतियों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा किया था। इसके बाद उन्हें यमनी सेना के कुछ पुराने हथियारों तक पहुंच मिली। समय के साथ उनके हथियारों में बदलाव और ड्रोन निर्माण की क्षमता विकसित होने की खबरें सामने आईं। अमेरिका और सऊदी अरब लंबे समय से ईरान पर हूतियों को हथियार, तकनीक और प्रशिक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं। ईरान और हूती इन आरोपों से इनकार करते हैं। मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब्त की गई हथियार खेपों की जांच में 800 से अधिक उपकरण और करीब 750 टन हथियार सामग्री का उल्लेख किया गया था। हालांकि, इस जानकारी और हथियारों के स्रोतों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

4. सैन्य कार्रवाई के बावजूद हूतियों को रोकना मुश्किल क्यों?

हूतियों की सैन्य चुनौती का एक बड़ा कारण यमन का भौगोलिक स्वरूप है। पहाड़ी इलाकों में मौजूद ठिकानों तक पहुंचना मुश्किल होता है, जिससे सैन्य कार्रवाई जटिल हो जाती है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से हथियार ठिकानों पर हमले किए जाने के बावजूद हूतियों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसके अलावा समुद्र में विस्फोटकों से भरी रिमोट-नियंत्रित नावों का इस्तेमाल भी जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। हूतियों के पास मौजूद लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं, लेकिन सटीक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं है।

5. लाल सागर और वैश्विक व्यापार पर कितना खतरा?

हूतियों के हमलों का सबसे व्यापक असर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप तथा एशिया के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले बढ़ते हैं, तो शिपिंग कंपनियों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। इससे माल ढुलाई का खर्च, बीमा प्रीमियम और तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव के बीच बाब अल-मंदेब में अस्थिरता वैश्विक व्यापार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इस तरह हूतियों की मिसाइल और ड्रोन क्षमता केवल क्षेत्रीय सैन्य चुनौती नहीं है, बल्कि समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।

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