विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नेपाल दौरा टला, भारत-नेपाल रिश्तों पर उठ रहे सवाल

भारत सरकार नेपाल में बनी नई बालेन शाह सरकार के साथ शुरुआती स्तर पर संवाद बढ़ाना चाहती थी। इसी उद्देश्य से विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यात्रा तय की गई थी। माना जा रहा था कि इस दौरे के जरिए भारत नेपाल की नई सरकार की प्राथमिकताओं को समझने और द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने की कोशिश करता।;

Update: 2026-05-08 09:52 GMT

काठमांडू: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का प्रस्तावित नेपाल दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। विक्रम मिस्री को 11 मई को दो दिवसीय यात्रा पर काठमांडू पहुंचना था, लेकिन अब यह दौरा अनिश्चितकाल के लिए टल गया है। इस घटनाक्रम ने भारत-नेपाल संबंधों को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

नई बालेन शाह सरकार से संवाद की तैयारी थी

भारत सरकार नेपाल में बनी नई बालेन शाह सरकार के साथ शुरुआती स्तर पर संवाद बढ़ाना चाहती थी। इसी उद्देश्य से विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यात्रा तय की गई थी। माना जा रहा था कि इस दौरे के जरिए भारत नेपाल की नई सरकार की प्राथमिकताओं को समझने और द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने की कोशिश करता। सूत्रों के मुताबिक, मिस्री की यात्रा के दौरान व्यापार, सीमा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इसके अलावा भारत की ओर से नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से नई दिल्ली आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया जाना था।

भारतीय पक्ष ने व्यस्तता का हवाला दिया

नेपाल के विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि भारत की तरफ से यह कहा गया कि विदेश सचिव की व्यस्तताओं के कारण फिलहाल यात्रा स्थगित की जा रही है। हालांकि, यात्रा रद्द करने के पीछे कोई स्पष्ट और आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। नेपाल सरकार के भीतर भी इस अचानक बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ व्यस्तता नहीं, बल्कि कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक कारण भी हो सकते हैं।

बालेन शाह के रवैये ने बढ़ाई दूरी?

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार के कुछ अधिकारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का भारतीय विदेश सचिव से मुलाकात को लेकर उत्साह नहीं दिखाना भी दौरा टलने की बड़ी वजह हो सकता है। बताया जा रहा है कि बालेन शाह ने अब तक किसी भी विदेशी दूत या वरिष्ठ अधिकारी से वन-टू-वन मुलाकात नहीं की है। इससे पहले वे अमेरिका के सहायक विदेश सचिव समीर कपूर और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर से भी मिलने से इनकार कर चुके हैं, जबकि दोनों अधिकारी काठमांडू पहुंचे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि बालेन शाह फिलहाल घरेलू राजनीति और स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं। वे भारत, चीन और अमेरिका के बीच चल रही क्षेत्रीय शक्ति राजनीति से दूरी बनाए रखने की रणनीति अपना रहे हैं।

केवल शीर्ष नेताओं से ही मुलाकात की नीति?

नेपाल में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बालेन शाह ने अनौपचारिक रूप से एक नीति बनाई है जिसके तहत वे केवल किसी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के नेताओं से ही मुलाकात करेंगे। यानी वे विदेश सचिव या राजदूत स्तर के अधिकारियों से सीधे मुलाकात करने से बच रहे हैं। अगर यह आकलन सही है तो संभव है कि विक्रम मिस्री से मुलाकात को लेकर भी यही कारण सामने आया हो। हालांकि नेपाल सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

लिपुलेख और मानसरोवर यात्रा भी बना तनाव का कारण

भारत और नेपाल के बीच हाल में लिपुलेख त्रिसंगम क्षेत्र को लेकर भी विवाद उभरा है। नेपाल ने भारत और चीन के उस फैसले पर आपत्ति जताई थी जिसमें विवादित क्षेत्र के रास्ते तिब्बत स्थित मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी। नेपाल लंबे समय से लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है। ऐसे में भारत-चीन के बीच इस मार्ग को लेकर हुई सहमति ने काठमांडू को नाराज कर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी मुद्दे ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक माहौल को कुछ हद तक प्रभावित किया है और विदेश सचिव स्तर की यात्रा पर भी इसका असर पड़ा हो सकता है।

मॉरीशस में बनी थी यात्रा की सहमति

जानकारी के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मॉरीशस में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच मुलाकात हुई थी। इसी दौरान विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा पर सहमति बनी थी। इसके बाद भारत ने औपचारिक रूप से 11 और 12 मई की तारीख प्रस्तावित की थी। नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने मिस्री को निमंत्रण भी भेजा था और विदेश मंत्रालय ने यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। यात्रा को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई थी। ऐसे में अंतिम समय में दौरा स्थगित होने से कूटनीतिक हलकों में हैरानी है।

नेपाल के भीतर भी उठ रहे सवाल

नेपाल के विदेश मंत्रालय के कुछ अधिकारियों का कहना है कि बालेन शाह को भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलना चाहिए था ताकि नेपाल के पारंपरिक साझेदार देशों के साथ संतुलित और सकारात्मक संबंध बनाए रखे जा सकें। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी बालेन शाह से इस संबंध में आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने इस पर ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।

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