नई दिल्ली। रूस के ब्लैक सी तट के पास एक तेल टैंकर को समुद्री ड्रोन से निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई है। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई और समुद्र में कच्चा तेल जलने लगा। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 23 क्रू सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, जहाज पर सवार सभी लोग भारतीय नागरिक थे। यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले 48 घंटे में भारतीय नाविकों वाले तीन अलग-अलग जहाजों को ब्लैक सी और होर्मुज स्ट्रेट में हमलों का सामना करना पड़ा है। इससे समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हमले के बाद आसमान में छाया धुआं
रूस के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, लाइबेरिया के झंडे वाला तेल टैंकर हमले के बाद आग की चपेट में आ गया। समुद्र में कच्चा तेल जलने से बड़ी मात्रा में धुआं उठा। इसका असर रूस के प्रमुख रिसॉर्ट शहर सोची के कुछ इलाकों में भी दिखाई दिया, जहां आसमान काले धुएं से ढका नजर आया। प्रारंभिक जानकारी में हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों और जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।
यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में था टैंकर
हमले की चपेट में आए टैंकर का नाम एफ्रामैक्स रियो बताया गया है। द कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था। इसे रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ से भी जोड़ा गया है। शैडो फ्लीट उन जहाजों और तेल टैंकरों के नेटवर्क को कहा जाता है, जिन पर रूस के पश्चिमी प्रतिबंधों से बचते हुए तेल और अन्य सामान के निर्यात में इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। यूक्रेन ने फरवरी में इस जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका आरोप था कि ऐसे जहाज रूस को ऊर्जा से होने वाली आय बनाए रखने में मदद करते हैं।
48 घंटे में भारतीय नाविकों से जुड़ी तीसरी घटना
ब्लैक सी में यह घटना भारतीय नाविकों वाले जहाजों से जुड़ी लगातार तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 5 और 6 अक्टूबर को भी अलग-अलग समुद्री मार्गों पर भारतीय क्रू वाले जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। 6 अक्टूबर को होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज ‘MT ऑन पीस’ पर हमला हुआ था। जहाज पर 17 भारतीय नागरिक सवार थे, जिनमें से 11 घायल हुए।
इससे एक दिन पहले 5 अक्टूबर को ब्लैक सी में रोमानिया के पास MV रोयाद मम्मदोव को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। जहाज पर तीन भारतीय नाविक सवार थे। घटना के बाद जहाज डूब गया और दो विदेशी नागरिकों की मौत की जानकारी सामने आई। 11 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाया गया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया था कि जहाज पर रूसी ड्रोन से हमला हुआ।
ब्लैक सी बना युद्ध का नया समुद्री मोर्चा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी में समुद्री हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। पिछले करीब दो महीनों में दोनों पक्षों की ओर से 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इनमें अनाज ले जाने वाले पोत, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक जहाज शामिल हैं। लगातार हमलों का असर समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। जहाज संचालक इस मार्ग पर जाने से बच रहे हैं, जबकि बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
गेहूं और मक्का की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव
रूस और यूक्रेन वैश्विक अनाज व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों देश मिलकर दुनिया के करीब 30 फीसदी गेहूं निर्यात में हिस्सेदारी रखते हैं और उनके अनाज का बड़ा हिस्सा ब्लैक सी के समुद्री मार्गों से दूसरे देशों तक पहुंचता है। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर करीब 17 लाख टन रह गया था। यह लगभग 71 फीसदी की गिरावट है। सितंबर में भी निर्यात करीब 50 फीसदी घटकर 24.5 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में ब्लैक सी में बढ़ते हमलों से न सिर्फ रूस-यूक्रेन क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि वैश्विक व्यापार, खाद्य आपूर्ति और गेहूं-मक्का जैसी प्रमुख कृषि जिंसों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।