ढाका : भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध प्रवासियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बांग्लादेश ने आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां कथित रूप से अवैध प्रवासियों को उसकी सीमा में भेजने की कोशिश कर रही हैं। ढाका का दावा है कि पिछले 24 घंटों के दौरान ऐसे कई प्रयास किए गए, जिन्हें उसकी सीमा सुरक्षा एजेंसी ने विफल कर दिया। बांग्लादेश का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों का समाधान दोनों देशों के बीच स्थापित कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए। वहीं इस घटनाक्रम ने सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
बीजीबी ने बढ़ाई सीमा पर निगरानी
बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा बल ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ (बीजीबी) ने दावा किया है कि उसने हाल के दिनों में कई संदिग्ध गतिविधियों को रोका है। एजेंसी के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। बीजीबी ने यह भी कहा कि सीमा पर किसी भी व्यक्ति के प्रवेश या वापसी की प्रक्रिया दोनों देशों के नियमों और आपसी समझौतों के अनुरूप ही होनी चाहिए। एजेंसी के मुताबिक, झिनाइदाह क्षेत्र में कुछ लोगों को सीमा पार भेजने की कथित कोशिश की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी है साझा सीमा भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो दुनिया की सबसे जटिल और संवेदनशील सीमाओं में गिनी जाती है। यह सीमा पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है। भौगोलिक परिस्थितियों, नदी क्षेत्रों और आबादी की घनत्व के कारण सीमा प्रबंधन दोनों देशों के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। समय-समय पर अवैध घुसपैठ, तस्करी और नागरिकों की पहचान से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय बनते रहे हैं।
राजनीतिक बदलावों के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में हुए बदलावों के बाद सीमा से जुड़े मुद्दे और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। 2024 के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन हालिया विवाद ने इन प्रयासों को चुनौती दी है। भारत के सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सख्त रुख अपनाया जाता रहा है। वहीं बांग्लादेश का कहना है कि किसी भी नागरिक की वापसी या पहचान से जुड़े मामलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार ही निपटाया जाना चाहिए।
दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी नजरें
सीमा विवाद और अवैध प्रवासियों के मुद्दे के बीच दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होने वाली है। 8 से 11 जून के बीच नई दिल्ली में भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा प्रमुखों की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में सीमा प्रबंधन, अवैध आव्रजन, सुरक्षा सहयोग और सीमा पर होने वाली गतिविधियों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बांग्लादेश की राजनीति में भी हलचल तेज
सीमा विवाद के बीच बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अवामी लीग की वरिष्ठ नेता और नारायणगंज सिटी कॉरपोरेशन की पूर्व मेयर सेलीना हयात को जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई को बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले अवामी लीग से जुड़े कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी कानूनी मामलों में राहत मिली थी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन घटनाओं का देश की आंतरिक राजनीति पर असर पड़ सकता है।
अवामी लीग पर प्रतिबंध को लेकर बहस
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप’ (आईसीजी) ने बांग्लादेश सरकार से अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी फैसलों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इस अपील के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर सरकार अपने फैसलों का बचाव कर रही है, वहीं विपक्षी और राजनीतिक विश्लेषक लोकतांत्रिक भागीदारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
सीमा और राजनीति, दोनों मोर्चों पर चुनौती
भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए मौजूदा समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ सीमा पर अवैध प्रवासियों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं, तो दूसरी ओर बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में तेजी से बदलते हालात भी क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताएं और राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि यह तनाव संवाद के जरिए कम होता है या और गहरा होता है।