असम के सीएम हिमंता सरमा के बयान पर बांग्लादेश की आपत्ति, भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब

सरमा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि असम अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करता रहेगा और ऐसे लोगों को वापस भेजने का अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के साथ उन्होंने उन लोगों की दो तस्वीरें भी साझा की थीं, हालांकि उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को धुंधला कर दिया गया था। इसी पोस्ट की भाषा और शैली को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है।;

Update: 2026-05-01 05:12 GMT

ढाका/नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक हालिया बयान को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया। इस दौरान बांग्लादेश ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की टिप्पणियां दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और भविष्य में ऐसे बयानों से बचा जाना चाहिए।

उच्चायुक्त को बुलाकर जताई नाराजगी

गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय (MoFA) में हुई बैठक में दक्षिण एशिया मामलों की महानिदेशक इशरत जहां ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान बांग्लादेश की ओर से असम के मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका ने इन टिप्पणियों को दोनों देशों के संबंधों के लिए अपमानजनक बताया और अपनी असहमति स्पष्ट रूप से व्यक्त की।

आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन संकेत स्पष्ट

हालांकि इस पूरे मामले पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कोई औपचारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया यह कदम अपने आप में गंभीरता को दर्शाता है। किसी देश द्वारा दूसरे देश के राजनयिक को तलब करना आम तौर पर कड़ा विरोध दर्ज कराने का संकेत माना जाता है।

क्या था सीएम सरमा का बयान

दरअसल, यह विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा 25 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर किए गए एक पोस्ट से शुरू हुआ। अपने पोस्ट में उन्होंने बताया कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया गया। उन्होंने एक सख्त लहजे में लिखा कि “लातों के भूत बातों से नहीं मानते,” और कहा कि जो लोग स्वेच्छा से नहीं जाते, उन्हें “धक्का देकर वापस” भेजा जाता है।

सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाया विवाद

सरमा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि असम अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करता रहेगा और ऐसे लोगों को वापस भेजने का अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के साथ उन्होंने उन लोगों की दो तस्वीरें भी साझा की थीं, हालांकि उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को धुंधला कर दिया गया था। इसी पोस्ट की भाषा और शैली को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है।

संयम बरतने की सलाह

बांग्लादेश ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए ऐसे बयान, जो संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों को छूते हैं, दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर सकते हैं। ढाका ने भारत से अपेक्षा जताई कि इस तरह के मामलों में संयम बरता जाए और ऐसी भाषा का इस्तेमाल न किया जाए जिससे आपसी विश्वास प्रभावित हो।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंध काफी मजबूत रहे हैं। व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाया है। ऐसे में किसी भी तरह की तीखी बयानबाजी को कूटनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह सकारात्मक माहौल को प्रभावित कर सकती है।

घुसपैठ का मुद्दा और राजनीतिक संदर्भ

असम में अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। राज्य सरकार इस पर सख्त रुख अपनाती रही है और समय-समय पर कार्रवाई भी करती रही है। हालांकि, इस तरह के मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय भाषा और कूटनीतिक मर्यादा का पालन करना जरूरी माना जाता है, खासकर जब मामला पड़ोसी देश से जुड़ा हो।

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