बैकोनूर (कजाखस्तान): भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने मंगलवार को अपने पहले अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत करते हुए रूस के सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। उनके साथ रूस के अनुभवी कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। तीनों अंतरिक्ष यात्री लगभग आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और कई अंतरराष्ट्रीय प्रयोगों को अंजाम देंगे।
बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से हुआ सफल प्रक्षेपण
यह प्रक्षेपण कजाखस्तान स्थित बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से स्थानीय समयानुसार सुबह 10:47 बजे किया गया। उड़ान के करीब 10 मिनट बाद सोयूज यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक लगभग तीन घंटे की यात्रा शुरू हुई। यह मिशन ISS के 75वें रोटेशन क्रू का हिस्सा है और लंबे समय बाद मरम्मत किए गए लॉन्च पैड से पहली मानवयुक्त उड़ान भी माना जा रहा है।
अनिल मेनन के लिए ऐतिहासिक पल
49 वर्षीय अनिल मेनन के लिए यह पहला अंतरिक्ष मिशन है। वह पेशे से चिकित्सक और एयरोस्पेस विशेषज्ञ हैं तथा नासा के अंतरिक्ष यात्री दल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना अपने दूसरे अंतरिक्ष अभियान पर निकले हैं। ISS पहुंचने के बाद यह दल वहां पहले से मौजूद नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिलकर विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम करेगा।
तनाव के बीच भी जारी है अमेरिका-रूस का अंतरिक्ष सहयोग
इस मिशन को वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में तनाव बना हुआ है, लेकिन अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सहयोग लगातार जारी है। प्रक्षेपण के दौरान नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रमुख दिमित्री बकानोव भी बैकोनूर में मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि पिछले आठ वर्षों में किसी नासा प्रमुख की यह पहली रूस यात्रा थी।
लॉन्च से पहले जेरेड आइजैकमैन ने मिशन की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कई महीनों से अमेरिका और रूस की टीमों ने पूरी पेशेवर प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान को वैश्विक सहयोग का ऐसा क्षेत्र बताया, जहां विज्ञान और मानवता को प्राथमिकता दी जाती है।
ISS पर होंगे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग
ISS पहुंचने के बाद नया दल करीब आठ महीने तक माइक्रोग्रैविटी से जुड़े वैज्ञानिक प्रयोग, जैविक अनुसंधान, नई अंतरिक्ष तकनीकों का परीक्षण और भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों से संबंधित कई परियोजनाओं पर काम करेगा। इन अध्ययनों से अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ पृथ्वी पर चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
केरल में जश्न, अनिल मेनन पर गर्व
अनिल मेनन की ऐतिहासिक उड़ान पर उनके पैतृक राज्य केरल में खुशी और गर्व का माहौल है। उनकी पारिवारिक जड़ें पलक्कड़ जिले के ओट्टापालम क्षेत्र से जुड़ी हैं। वे पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सर सी. शंकरन नायर के परपोते भी हैं। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अनिल मेनन को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि राज्य और देश दोनों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने याद किया कि पिछले वर्ष उन्हें मेनन के पैतृक घर चेट्टूर हाउस जाने और सर शंकरन नायर को श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला था। राज्य के नेताओं ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अनिल मेनन की सफलता नई पीढ़ी के युवाओं को विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
विज्ञान और सहयोग का नया अध्याय
सोयूज एमएस-29 मिशन केवल एक नियमित अंतरिक्ष अभियान नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि वैश्विक राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग कायम रह सकता है। भारतीय मूल के अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष उड़ान न केवल उनके व्यक्तिगत करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि दुनिया भर के भारतीय समुदाय के लिए भी गर्व का क्षण है। आने वाले महीनों में ISS पर उनके शोध और वैज्ञानिक कार्य अंतरिक्ष विज्ञान की नई उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।