रूस से डीजल खरीदेगा अमेरिका, भारत पर टैरिफ लगाने वाले ट्रंप के फैसले पर उठे सवाल

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पुतिन के साथ बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेताओं के बीच रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर सहमति बनी है। ट्रंप के मुताबिक, रूस तुरंत अमेरिकी और वैश्विक बाजार को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा।;

Update: 2026-10-11 07:38 GMT

वॉशिंगटन : रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब खुद रूस से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने की तैयारी में हैं। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद दावा किया कि मॉस्को जल्द ही अमेरिकी और वैश्विक बाजार में डीजल की आपूर्ति करेगा। इस घोषणा ने अमेरिकी ऊर्जा नीति और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए गए शुल्क को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका का तर्क रहा है कि रूस से ऊर्जा खरीदकर दूसरे देश यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को को आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अमेरिका खुद रूस से ईंधन खरीदता है, तो क्या यह उसके अपने तर्क से विरोधाभासी नहीं है?

रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पुतिन के साथ बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेताओं के बीच रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर सहमति बनी है। ट्रंप के मुताबिक, रूस तुरंत अमेरिकी और वैश्विक बाजार को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन और इसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति किए जाने की बात भी कही। ट्रंप ने आगे दावा किया कि रूसी रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ ही समय में 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जा सकती है। उनके बयान के मुताबिक, रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंध अप्रैल 2027 तक हटा दिया गया है। हालांकि, इन दावों और प्रतिबंधों में बदलाव की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ, अब अमेरिका की अपनी खरीद

रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। अमेरिकी प्रशासन ने यह कदम रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी ऊर्जा आय को सीमित करने के तर्क के साथ उठाया था। अब रूस से डीजल खरीदने की ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नीति की निरंतरता पर सवाल उठने लगे हैं। यदि रूसी ईंधन की खरीद रूस को राजस्व उपलब्ध कराने के कारण दूसरे देशों के लिए दंडात्मक शुल्क का आधार बनती है, तो अमेरिका की प्रस्तावित खरीद को किस आधार पर उचित ठहराया जाएगा? इस सवाल का जवाब अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।

ईरान युद्ध से बढ़ीं ईंधन कीमतें

अमेरिका में ईंधन की ऊंची कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। ईरान के साथ जारी टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें भी राजनीतिक बहस का अहम मुद्दा बन गई हैं। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण और रूस से डीजल की आपूर्ति से ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। उन्होंने किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए लागत कम करने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। हालांकि, कीमतों में वास्तविक गिरावट आपूर्ति, वैश्विक मांग और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति पर भी निर्भर करेगी।

वैश्विक बाजार पर असर की उम्मीद

ट्रंप ने बातचीत के दौरान पुतिन को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं। रूसी राष्ट्रपति ने इसके लिए आभार जताते हुए कहा कि अमेरिकी और वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की प्रस्तावित आपूर्ति से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ट्रंप ने भी तेल समझौते के लिए पुतिन को धन्यवाद दिया।

ईरान के साथ टकराव पर भी ट्रंप का सख्त रुख

रूस से डीजल आपूर्ति के दावे के साथ ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह टकराव जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन इसके दो ही रास्ते हैं—लड़ाई जारी रहना या ईरान का अमेरिकी शर्तों पर समझौते के लिए तैयार होना। न्यूयॉर्क में एक चुनावी रैली से इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना, वायु सेना, रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को भी कमजोर बताया। रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी घोषणा ऐसे समय आई है, जब वाशिंगटन रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बनाने की नीति अपना रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रस्तावित आपूर्ति वास्तव में कितनी होती है और अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव करता है या नहीं।

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