अमेरिका की जंग खत्म करने के लिए 5 शर्तें: ईरान को मुआवजा नहीं, एनरिच्ड यूरेनियम सौंपे, ईरान ने भी जवाब में रखीं पांच शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के पास अब बहुत कम समय बचा है और यदि उसने जल्द फैसला नहीं लिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।;

Update: 2026-05-18 11:36 GMT

वॉशिंगटन/ तेहरान। पश्चिम एशिया में पिछले डेढ़ महीने से जारी युद्धविराम अब टूटने की कगार पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय हालात को एक बार फिर संवेदनशील बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, ईरान की नई शर्तें और यूएई में परमाणु संयंत्र के पास ड्रोन हमले की घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावों और जवाबी शर्तों का दौर जारी है, लेकिन फिलहाल किसी समझौते की संभावना कमजोर नजर आ रही है।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी से बढ़ी बेचैनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के पास अब बहुत कम समय बचा है और यदि उसने जल्द फैसला नहीं लिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि “समय तेजी से निकल रहा है” और ईरान को तुरंत शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उनके इस बयान को पश्चिम एशिया में संभावित बड़े सैन्य तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

‘तूफान से पहले की शांति’ वाली पोस्ट ने बढ़ाई अटकलें

तनाव के बीच ट्रंप की एक और सोशल मीडिया पोस्ट ने चर्चाओं को और तेज कर दिया। उन्होंने एक एआई-निर्मित तस्वीर साझा की, जिसमें वह अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर में समुद्र में तूफानी माहौल और पृष्ठभूमि में ईरानी झंडे वाले युद्धपोत नजर आ रहे थे। इस तस्वीर के साथ ट्रंप ने लिखा, “यह तूफान से पहले की शांति है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट ईरान को अप्रत्यक्ष चेतावनी देने का प्रयास हो सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की एक अहम बैठक भी बुलाई है, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित रणनीति पर चर्चा की जा सकती है।

अमेरिका का पांच सूत्रीय प्रस्ताव 

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने तेहरान को पांच बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है। इसमें ईरान को केवल एक परमाणु केंद्र संचालित करने की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंप दे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों का केवल सीमित हिस्सा जारी करने को तैयार है। वहीं, युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए किसी प्रकार के मुआवजे से भी अमेरिका ने इनकार कर दिया है।

ईरान ने रखीं अपनी शर्तें 

अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने भी पांच प्रमुख शर्तें सामने रख दी हैं। ईरान का कहना है कि वह तभी वार्ता की मेज पर लौटेगा जब क्षेत्र में सभी सैन्य अभियान पूरी तरह बंद किए जाएं। ईरान ने विशेष रूप से लेबनान के खिलाफ इजरायली कार्रवाई रोकने की मांग की है। इसके साथ ही उसने सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने, विदेशों में फ्रीज संपत्तियां जारी करने और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग रखी है। तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की बात भी दोहराई है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का सख्त रुख

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते किसी भी सैन्य हथियारों की खेप को गुजरने नहीं देगा। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने कहा कि दुश्मनों ने इसी रास्ते का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।

यूएई में ड्रोन हमले से बढ़ी चिंता

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने दावा किया है कि उसके एकमात्र परमाणु संयंत्र परिसर में ड्रोन हमले के कारण आग लग गई। हालांकि किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और यूएई ने भी सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी बड़े नुकसान या रेडिएशन रिसाव का खतरा नहीं है। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल

तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान पहुंचकर ईरानी नेतृत्व से मुलाकात की और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

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