शेख हसीना सरकार के गिराने में थी अमेरिका की भूमिका? लीक ऑडियो से बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल
लीक ऑडियो में कथित तौर पर एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को बांग्लादेश की इस्लामिक राजनीतिक ताकतों के साथ संभावित संवाद, शेख हसीना के बाद के राजनीतिक परिदृश्य और सत्ता संतुलन को लेकर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है।
ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के कई महीने बाद एक लीक हुई राजनयिक ऑडियो रिकार्डिंग ने दक्षिण एशियाई राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस ऑडियो क्लिप ने उन आरोपों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिनमें अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के पीछे अमेरिका की भूमिका होने की बात कही जाती रही है। अंतरराष्ट्रीय पोर्टल ‘स्ट्रैटन्यूज ग्लोबल’ द्वारा जारी इस रिकार्डिंग ने वाशिंगटन को सीधे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है और मुस्लिम बहुल बांग्लादेश की राजनीति में ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। यह ऑडियो ऐसे समय सामने आया है, जब देश आम चुनावों की ओर बढ़ रहा है और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की वैधता को लेकर पहले से ही तीखी बहस चल रही है। अब अवामी लीग ने इस लीक को “विदेशी हस्तक्षेप का ठोस सबूत” बताते हुए इसे बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया है।
क्या है लीक हुई राजनयिक रिकार्डिंग?
लीक ऑडियो में कथित तौर पर एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को बांग्लादेश की इस्लामिक राजनीतिक ताकतों के साथ संभावित संवाद, शेख हसीना के बाद के राजनीतिक परिदृश्य और सत्ता संतुलन को लेकर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है। रिकार्डिंग में यह संकेत मिलता है कि सत्ता परिवर्तन के बाद देश की दिशा क्या हो सकती है और किन ताकतों के साथ काम करना रणनीतिक रूप से लाभकारी होगा। हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस आडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसके सामने आते ही बांग्लादेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अवामी लीग का कहना है कि यह रिकार्डिंग उनके उस पुराने आरोप की पुष्टि करती है कि हसीना सरकार का पतन केवल आंतरिक जनआंदोलन का नतीजा नहीं था।
अवामी लीग का आरोप: ‘खुली साजिश’
पूर्व शिक्षा मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता मोहिबुल हसन चौधरी ने इस आडियो को “खुली साजिश” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह रिकार्डिंग साफ तौर पर दिखाती है कि अगस्त 2024 में हुआ सत्ता परिवर्तन एक “स्वैच्छिक या ऑर्गेनिक” आंदोलन नहीं था, बल्कि इसके पीछे बाहरी शक्तियों की भूमिका थी। चौधरी के अनुसार, “इस ऑडियो से यह स्पष्ट होता है कि पोस्ट इलेक्शन मैनेजमेंट के नाम पर एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर किया गया। बांग्लादेश की संप्रभुता के साथ समझौता हुआ और देश को रणनीतिक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया गया।” अवामी लीग का दावा है कि यह लीक केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बाहरी हस्तक्षेप का गंभीर संकेत है।
संप्रभुता और लोकतंत्र पर सवाल
इस पूरे विवाद के बीच अवामी लीग ने अंतरिम सरकार की वैधता पर भी सीधा सवाल उठाया है। मोहिबुल हसन चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि अवामी लीग जैसी बड़ी और जनाधार वाली पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो यह देश के करोड़ों मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने जैसा होगा। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में बनने वाली कोई भी सरकार जनता के वास्तविक जनादेश का प्रतिनिधित्व नहीं करेगी और उसे लोकतांत्रिक रूप से “अवैध” माना जाएगा। अवामी लीग का तर्क है कि समावेशी चुनाव के बिना स्थायी राजनीतिक स्थिरता संभव नहीं है।
अंतरिम सरकार की चुप्पी और बढ़ते सवाल
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अब तक इस लीक ऑडियो पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दे पाई है। सरकार समर्थक खेमे का कहना है कि अवामी लीग सत्ता से बाहर होने के बाद हर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय साजिश से जोड़ रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रिकार्डिंग, चाहे उसकी प्रामाणिकता पर सवाल हों, चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है और अंतरिम सरकार की पारदर्शिता पर दबाव बढ़ा सकती है।
पाकिस्तान और आईएसआई की भूमिका पर नए आरोप
इस विवाद में एक और संवेदनशील आयाम तब जुड़ा, जब अवामी लीग के पूर्व सांसद बहाउद्दीन नसीम ने बांग्लादेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मौजूदगी का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि हाल के महीनों में पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया अधिकारियों की ढाका में गतिविधियां बढ़ी हैं। नसीम का कहना है, “आईएसआई का दूसरा सबसे बड़ा अधिकारी ढाका आया था। पाकिस्तानी सेना के जनरल लगातार बांग्लादेश का दौरा कर रहे हैं। यह संकेत देता है कि अंतरिम प्रशासन ने देश में विदेशी प्रभाव बढ़ने दिया है।”इन आरोपों ने बांग्लादेश की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय राजनीति पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रही है।
अमेरिका पर बढ़ता दबाव
लीक ऑडियो के बाद अमेरिका पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह इन आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाए। वाशिंगटन लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि वह बांग्लादेश में लोकतांत्रिक और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करता है, न कि किसी सरकार के तख्तापलट का। लेकिन अवामी लीग और उसके समर्थकों का कहना है कि शब्दों और कार्यों में अंतर साफ दिखाई देता है। उनके अनुसार, यह आडियो उस “दोहरी नीति” का उदाहरण है, जिसके तहत लोकतंत्र की बात करते हुए जमीनी राजनीति को प्रभावित किया जाता है।
चुनाव से पहले बढ़ता राजनीतिक तापमान
लीक हुई इस राजनयिक रिकार्डिंग ने बांग्लादेश की राजनीति में अनिश्चितता और अविश्वास को और गहरा कर दिया है। जहां अवामी लीग इसे विदेशी साजिश का प्रमाण बता रही है, वहीं अंतरिम सरकार और उसके समर्थक इसे सत्ता में वापसी की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह विवाद बांग्लादेश के चुनावी माहौल, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है। एक बात तय है, यह लीक ऑडियो केवल एक रिकार्डिंग नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की जटिल राजनीति में एक नया अध्याय बन चुका है।